गुरु के चरणों में श्रद्धा और समर्पण से बढ़कर कोई भक्ति नहीं होती। जब हम अपने गुरुदेव के चरण-कमलों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, तो हमारी आत्मा भी उनके दिव्य आशीर्वाद से प्रफुल्लित हो उठती है। “हे गुरुवर तव चरण कमल में श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं” भजन इसी भाव को व्यक्त करता है, जो भक्तों को गुरु प्रेम और उनकी कृपा का एहसास कराता है।
Hey Guruvar Tav Charan Kamal Mai Shradha Suman Chadate Hai
हे गुरुवर तव चरण कमल में,
श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं,
चरण धूलि निज माथे रख कर,
तुमको शीश झुकाते हैं।।
माया के इस अंधकार को,
प्रभुवर तुमने दूर किया,
झूठ कपट से दूर रहें हम,
ज्ञान हमें भरपूर दिया,
कृपा बरसती रहे तुम्हारी,
ये आशीष मांगते हैं,
तेरी पूजा में है गुरुवर,
नित नव सुमन चढ़ाते हैं।।
श्रीराम को भी प्रभु तुमने,
मर्यादा का पाठ पढ़ाया,
कर्म योग का पाठ पढ़ाकर,
श्रीकृष्ण से कर्म कराया,
सच्चाई के पथ पर चलने का,
नित पाठ पढ़ाते हैं,
नेक कर्म कर जियें जगत में,
आप हमें सिखलाते हैं।।
राम तजें पर तुम्हें न भूले,
निश दिन तुमको ध्यायेगे,
तुम्हे तजे जो नर है गुरुवर,
कैसे भव तर पाएंगे,
ब्रम्हा बिष्णु शिव में तुम हो,
ये सद ग्रंथ बताते हैं,
साक्षात परब्रम्ह तुम्ही हो,
सब में आप समाते हैं।।
हे गुरुवर तव चरण कमल में,
श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं,
चरण धूलि निज माथे रख कर,
तुमको शीश झुकाते हैं।।
गुरुदेव के चरणों में सच्चे प्रेम और समर्पण से ही हमें आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। “हे गुरुवर तव चरण कमल में श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं” जैसे भजनों का गायन और पठन हमें गुरु कृपा के निकट ले जाता है। यदि आपको यह भजन अच्छा लगा, तो “गुरुवर के चरणों में मेरा है प्रणाम”, “गुरु की महिमा अपरंपार”, “सतगुरु तुम सागर मैं मीना”, और “आओ गुरु नाम की महिमा गाए” भजनों को भी अवश्य पढ़ें और गुरुदेव की भक्ति में लीन हों।

मैं हेमानंद शास्त्री, एक साधारण भक्त और सनातन धर्म का सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य धर्म, भक्ति और आध्यात्मिकता के रहस्यों को सरल भाषा में भक्तों तक पहुँचाना है। शनि देव, बालाजी, हनुमान जी, शिव जी, श्री कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं की महिमा का वर्णन करना मेरे लिए केवल लेखन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से पूजन विधि, मंत्र, स्तोत्र, आरती और धार्मिक ग्रंथों का सार भक्तों तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। जय सनातन धर्म