गणपति गायत्री मंत्र का जाप श्रीगणेश की कृपा प्राप्त करने और सभी कार्यों में सफलता पाने हेतु किया जाता है। Ganpati Gayatri Mantra भक्तों को एकाग्रता, समझदारी और शुभ आरंभ का आशीर्वाद देता है। यह मंत्र हर शुभ कार्य की नींव रखने से पहले अवश्य जपना चाहिए।
Ganpati Gayatri Mantra Lyrics
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥1॥
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥2॥
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥3॥

गणपति गायत्री मंत्र का नियमित जाप आपके जीवन से विघ्नों को दूर करता है और आत्मबल बढ़ाता है। इस मंत्र के अलावां यदि आप देवी-देवताओं के अन्य पवित्र गायत्री मंत्रों की जानकारी चाहते हैं, तो Bhakti Sandesh पर उपलब्ध शिव गायत्री मंत्र और सरस्वती गायत्री मंत्र भी ज़रूर पढ़ें। ये मंत्र भी आपकी साधना को पूर्णता देंगे।
Ganpati Gayatri Mantra की लोकप्रिय जाप विधि
- शुभ समय: प्रातः सूर्योदय से पहले ब्रह्ममुहूर्त सबसे उत्तम समय है। गणेश चतुर्थी, बुधवार या चतुर्थी तिथि पर विशेष फल मिलता है।
- शुभ दिशा: उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा या लाल रंग के आसन पर बैठें। मन को शांत रखें और भगवान श्रीगणेश का ध्यान करें।
- पूजन सामग्री: लाल पुष्प, दूर्वा (दूब), मोदक, रोली, अक्षत, देसी घी का दीपक।
- मंत्र उच्चारण: इस मंत्र का 108 बार जाप करें। जप करते समय श्रीगणेश जी की मूर्ति या फोटो के सामने बैठें और मन से विघ्नों के निवारण हेतु प्रार्थना करें।
- समापन: मोदक या गुड़ से बने लड्डू का भोग लगाएं। “गणपति बप्पा मोरया” का उच्चारण कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
FAQ
हाँ, प्रतिदिन इस मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है।
हाँ, यह मंत्र बुद्धि और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
उच्चारण शुद्ध और मन एकाग्र होना चाहिए। जल्दीबाज़ी या ध्यान भटकाना नहीं चाहिए।
लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला उपयुक्त होती है।