म्हारे मनड़े री डोर दादी खींचो थारी ओर भजन लिरिक्स

म्हारे मनड़े री डोर, दादी खींचो थारी ओर भजन भक्तों की गहरी आस्था और समर्पण को दर्शाता है। जब भी जीवन में भटकाव आता है, मन अशांत होता है, तब भक्त अपनी अरदास लेकर माता रानी के चरणों में जाते हैं और उन्हें अपनी ओर खींचने की प्रार्थना करते हैं। यह भजन माँ की कृपा, भक्तों की पुकार और उनके अटूट प्रेम का प्रतीक है।

Mhare Manade Ri Dor Dadi Khicho Thari Or Bhajan Lyrics

म्हारे मनड़े री डोर,
दादी खींचो थारी ओर,
थासु विनती करा हां,
दादी दोनों हाथा जोड़,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारें मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

जद से देख्यो थारो द्वारो,
भूल गयो हूँ जग मैं सारो,
कई जन्मा से है लेखो जोखो,
दादी थारो म्हारो,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारें मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

म्हाने भूल बिसर मति जाजो,
म्हारी विनती सुनके आजो,
मैं भी टाबरिया हाँ थारा दादी,
म्हासु भी बतलाजो,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारें मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

थे हो सारे जग की ठाकर,
म्हे हां थारे चरण का चाकर,
सारी दुनिया भूल गया हां,
दादी थाने म्हे तो पाकर,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारें मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

थारो सेवकियो है ‘श्याम’,
लेवे हर पल तेरो नाम,
थारे चरणा माहि दादी म्हारा,
सारा तीरथ धाम,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारें मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

म्हारे मनड़े री डोर,
दादी खींचो थारी ओर,
थासु विनती करा हां,
दादी दोनों हाथा जोड़,
म्हारे सिर पर हाथ फिराओ,
म्हणे हिवड़े से लगाओ,
म्हारी मावड़ी,
म्हारे मनडे री डोर,
दादी खींचो थारी ओर।।

माँ अपने भक्तों की पुकार कभी अनसुनी नहीं करतीं। जब भी कोई सच्चे दिल से उन्हें पुकारता है, वे अपने प्रेम और आशीर्वाद की डोर से उसे अपनी ओर खींच लेती हैं। यही विश्वास और श्रद्धा हमें हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति देता है, अगर आपको यह भजन पसंद आया हो, तो “तेरे दरबार को नहीं छोड़ना माता” और “मेरी मैया तुम्हे अर्पण, भला हम क्या करें” जैसे भजन भी सुनें, जो माँ के प्रति हमारी अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाते हैं।


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