जगदम्बा हमरे घर में पधार रही रे लिरिक्स

जब माँ जगदम्बा अपने भक्तों के घर पधारती हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय और आनंदमय हो जाता है। जगदम्बा हमरे घर में पधार रही रे भजन इसी दिव्य क्षण को दर्शाता है, जब भक्त अपने मन, घर और आत्मा को माँ के स्वागत के लिए तैयार करते हैं। यह भजन माँ के आशीर्वाद, उनकी उपस्थिति और भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।

Jagdamba Hamre Ghar Mien Padhar Rahi Re Lyrics

जगदम्बा हमरे घर में,
पधार रही रे।।

मोतियन चौक में द्वारे पुराऊं,
मल मल आसन सजाय दयों रे,
जगदम्बा हमरे घर मे,
पधार रही रे।।

गंगा जल से चरण पखारुं,
चरणन फूल चढ़ाए दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर मे,
पधार रही रे।।

कंचन थार कपूर की बाती,
मैया की आरती उतार दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर मे,
पधार रही रे।।

हलवा पूरी खीर बताशा,
मैया को भोग लगाएं दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर मे,
पधार रही रे।।

पान सुपाड़ी ध्वजा नारियल,
‘राजेंद्र’ भेंट चढ़ाए दइयों रे,
जगदम्बा हमरे घर मे,
पधार रही रे।।

जगदम्बा हमरे घर में,
पधार रही रे।।

गायक / प्रेषक – राजेंद्र प्रसाद सोनी।

जब माँ की कृपा हमारे घर में उतरती है, तो जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है। यह भजन हमें माँ के प्रति प्रेम और भक्ति की गहराइयों में डुबो देता है। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो “तेरे हाथ मेरी डोर, मैं पतंग मेरी माँ” भी जरूर पढ़ें और माँ की असीम कृपा का अनुभव करें। जय माता दी! ????✨

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