गुरु देव जी के गीत हमें आत्मबल, संकल्प और कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं। ना हो साथ कोई, अकेले बढ़ो तुम गीत यह सिखाता है कि सच्चे पथिक को भीड़ की नहीं, बल्कि अपने संकल्प और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है। जब हम इसे पढ़ते या करते हैं, तो हमारे भीतर आत्मनिर्भरता और निडरता की भावना जागृत होती है, जो हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की शक्ति देती है।
Na Ho Sath Koi Akele Badho Tum
ना हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम,
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।।1।।
सदा जो जगाए बिना ही जगा है,
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है,
वही बीज पनपा पनपना जिसे था,
घुना क्या किसी के उगाए उगा है।
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम,
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी।।2।।
सही राह को छोड़कर जो मुड़े है,
वही देखकर दूसरों को कुढ़े है,
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में,
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े है।
अगर उड़ सको तो पखेरु बनो तुम,
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी।।3।।
ना जो बर्फ की आँधियों से लड़े है,
कभी पग न उनके शिखर पर पड़े है,
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से,
वही जी चुराकर विमुख हो खड़े है।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम,
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी।।4।।
ना हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम,
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।।5।।
ना हो साथ कोई, अकेले बढ़ो तुम गीत हमें यह सिखाता है कि सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर अकेले भी चलना पड़े, तो भी पीछे नहीं हटना चाहिए। यदि यह गीत आपको प्रेरणा देता है, तो जिसने मरना सिख लिया है जीने का अधिकार उसी को, मेरी मातृभूमी मंदिर है, अब के बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे जैसे अन्य गीत को भी पढ़ें और अपनी आत्मशक्ति को जागृत करें। ????✨