कही पर्वत झुके भी है कही दरिया रूके भी है भजन हमें यह सिखाता है कि देश की रक्षा और स्वाभिमान के लिए कठिन से कठिन बाधाओं को भी पार किया जा सकता है। यह गीत साहस, धैर्य और समर्पण की भावना से भरपूर है, जो हर देशभक्त को प्रोत्साहित करता है। आइए, इस भजन के माध्यम से हम अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें।
Kahi Parvat Jhuke Bhi Hai Kahi Dariya Ruke Bhi Hai
कही पर्वत झुके भी है,
कही दरिया रूके भी है।
नहीं रूकती रवानी है,
नहीं झुकती जवानी है।।
गुरू गोबिंद के बच्चे,
उमर मे थे अगर कच्चे।
मगर थे सिंह के बच्चे,
धर्म ईमान के सच्चे,
गरज कर बोल उठे थे यूँ।
सिंह मुख खोल उठे थे यूँ,
नही हम रूके नही सकते,
नही हम झूके नही सकते।
कही पर्वत झुकें भी है,
कही दरिया रूके भी है।
नहीं रूकती रवानी है,
नहीं झुकती जवानी है।।
हमे निज देश प्यारा है,
हमे निज धर्म प्यारा है।
पिता दशमेश प्यारा है,
श्री गुरू ग्रंथ प्यारा है,
जोरावर जोर से बोला।
फतेहसिंह शोर से बोला,
रखो ईटें भरो गारा,
चुनो दिवार हत्यारों,
कही पर्वत झुकें भी है।
कही दरिया रूके भी है,
नहीं रूकती रवानी है,
नहीं झुकती जवानी है।।
निकलती स्वास बोलेगी,
हमारी लाश बोलेगी।
यही दिवार बोलेगी,
हजारों बार बोलेगी।
हमारे देश की जय हो,
पिता दशमेश की जय हो,
हमारे धर्म की जय हो।
श्री गुरू ग्रंथ की जय हो,
कही पर्वत झुकें भी है,
कही दरिया रूके भी है।
नहीं रूकती रवानी है,
नहीं झुकती जवानी है।।
कही पर्वत झुके भी है,
कही दरिया रूके भी है।
नहीं रूकती रवानी है,
नहीं झुकती जवानी है।।
देशभक्ति और अदम्य साहस का संदेश देने वाला यह भजन कही पर्वत झुके भी है कही दरिया रूके भी है हमें दृढ़ निश्चय के साथ अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है। इसी भावना के साथ आप Hum Logo Ko Samajh Sako Sako To Samajho Dilbar Jani, Divya Dhara Yah Bharati Jhalak Raha Anand Lyrics, Ab Jag Utho Kamar Kaso Manjil Ki Rah Bulati Hai Lyrics को भी पढ़ सकते हैं, जो हमारे देश प्रेम को और सशक्त बनाते हैं।