जिसने मरना सिख लिया है जीने का अधिकार उसी को भजन देशभक्ति और साहस की अद्भुत भावना को व्यक्त करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा देशभक्त वही है जो अपने देश के लिए जान देने से भी पीछे न हटे। आइए, इस भजन के माध्यम से हम अपने अंदर आत्म-बल और देश प्रेम को जागृत करें।
Jisane Marana Sikh Liya Hai Jine Ka Adhikar Usi Ko
जिसने मरना सिख लिया है,
जीने का अधिकार उसी को।
जो काँटों के पथ पर आया,
फूलों का उपहार उसी को,
जीने का अधिकार उसी को।।
जिसने गीत सजाये अपने,
तलवारों के झन-झन स्वर पर,
जिसने विप्लव राग अलापे।
रिमझिम गोली के वर्षण पर,
जो बलिदानों का प्रेमी है।
जगती का है प्यार उसी को,
जीने का अधिकार उसी को।।
हँस-हँस कर इक मस्ती लेकर,
जिसने सीखा है बलि होना,
अपनी पीड़ा पर मुस्काना।
औरों के कष्टों पर रोना,
जिसने सहना सीख लिया है।
संकट है त्यौहार उसी को,
जीने का अधिकार उसी को।।
दुर्गमता लख बीहड़ पथ की,
जो न कभी भी रुका कहीं पर।
अनगिनती आघात सहे पर,
जो न कभी भी झुका कहीं पर,
झुका रहा है मस्तक अपना।
यह सारा संसार उसी को,
जीने का अधिकार उसी को।।
जिसने मरना सिख लिया है,
जीने का अधिकार उसी को।
जो काँटों के पथ पर आया,
फूलों का उपहार उसी को,
जीने का अधिकार उसी को।।
साहस और देशभक्ति की मिसाल यह भजन जिसने मरना सिख लिया है जीने का अधिकार उसी को हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। इसी भावना को बनाए रखते हुए आप Jisane Marna Sikh Liya Hai Jine ka Adhikar Usi Ko, Vatana Ke Siva Kuchh Na Chahat Karenge, Jis Din Soya Rashtra Jagega और देशभक्ति के गीत को भी पढ़ सकते हैं, जो देश प्रेम को और प्रबल करते हैं।