आजादी की दुल्हन का श्रृंगार अभी तक बाकी है भजन हमारे देश की आज़ादी के संघर्ष और उसके बाद की चुनौतियों को बखूबी दर्शाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता के साथ-साथ देश की समृद्धि और विकास के लिए भी सतत प्रयास जरूरी हैं। आइए, इस भजन के माध्यम से हम अपने कर्तव्य को समझें और देश सेवा में आगे बढ़ें।
Ajadi Ki Dulhan Ka Shringar Abhi Tak Baki Hai
आजादी की दुल्हन का,
श्रृंगार अभी तक बाकी है।
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।।
हमने मंगल जीत लिया,
चंदा पे पानी सींच दिया।
गाड़ी को बदला तेजस से,
पर्वत पे फंदा खींच दिया,
पर भूखे मरते भारत का।
सम्मान अभी तक बाकी है,
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।।
पगडंडी को रोड़ बना,
जल थल की सीमा लांघ गए।
मरुधर में छाई हरियाली,
और कच्छ में छाई दिवाली,
पर मजदूरों के छालों पर।
अभी रोक लगाना बाकी है,
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।।
शिक्षा बढ़ी और ज्ञान बढा,
समृद्धि का संसार बना,
स्वस्थ बना परिवार सजन।
सम्मान का रुख प्रसस्थ हुआ,
पर स्वार्थी सर्पो के मुख से।
संविधान का लाना बाकी है,
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।।
देवी बनी है अबला अब,
कुपित कुष्ट है शरमाया।
अधर्मी बना है धर्म धुरंदर,
डर दहशत में शरमाया,
ऋषियों की भूमि पे।
राम राज्य आना बाकी है,
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।।
आजादी की दुल्हन का,
श्रृंगार अभी तक बाकी है।
है जंग हमारी खुद हमसे,
और जीत अभी तक बाकी है।
देश के विकास और समृद्धि के लिए प्रेरणा देने वाला यह भजन आजादी की दुल्हन का श्रृंगार अभी तक बाकी है हमें याद दिलाता है कि देशभक्ति की राह कभी समाप्त नहीं होती। इसी भावना में आप जन्नत से प्यारा भारत हमारा लिरिक्स, निज गौरव को निज वैभव को लिरिक्स, दे दी अपनी कुर्बानी हिंदुस्तान के लिए लिरिक्स जैसे भजनों को भी पढ़ सकते हैं, जो हमारे देश प्रेम को और सशक्त बनाते हैं।