दरबार सजा तेरा न्यारा, निरखत निरखत मैं हारा भजन भक्तों की गहरी श्रद्धा और हनुमान जी के अलौकिक दरबार की महिमा का वर्णन करता है। इस भजन में हनुमान जी के भव्य और दिव्य दरबार का सजीव चित्रण किया गया है, जहाँ श्रद्धालु अपने सारे कष्ट भूलकर केवल उनकी भक्ति में लीन हो जाते हैं।
Darbar Saja Tera Nyara Nirakhat Nirakhat Mai Hara Lyrics
दरबार सजा तेरा न्यारा,
निरखत निरखत मैं हारा।1।
सालासर थारो भवन विराजे,
झालर शंख नगाड़ा बाजे,
थारा सूरज सामी सा द्वारा,
निरखत निरखत मैं हारा।2।
दूर देश से चल कर आवां,
नाचां गावां थाने रिझावन,
थे हो भक्तां का पालनहारा,
निरखत निरखत मैं हारा।3।
चैत सुदी पूनम को मेलो,
भक्तां को लागो है रेलों,
थारे नाम का गूंजे जयकारा,
निरखत निरखत मैं हारा।4।
माँ अंजनी का लाल कहावो,
राम की महिमा हर दम गावो,
म्हारी नैया करयो भव पारा,
निरखत निरखत मैं हारा।5।
दरबार सजा तेरा न्यारा,
निरखत निरखत मैं हारा।6।
जब भक्त हनुमान जी के दरबार को निहारते हैं, तो उनकी भव्यता और दिव्यता देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यही कारण है कि इस भजन में “निरखत निरखत मैं हारा” कहकर भक्त की भावना को अभिव्यक्त किया गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से हनुमान जी के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जो जीवन के हर संकट से उबारने में सक्षम है। उनका दरबार हमें यह संदेश देता है कि जहां सच्ची श्रद्धा होती है, वहाँ चमत्कार अवश्य होते हैं।