आनंद ही आनंद बरस रहा बिहारी जी के द्वार पे
Anand Hi Anand Baras Raha Bihari Ji Ke Dwar Pe आनंद ही आनंद बरस रहा,बिहारी जी के द्वार पे,भक्तों का मन भी हरष रहा,बिहारी जी के द्वार पे।। पलकों से चौखट बुहारू,पल पल तेरी नज़र उतारू,जब भी मैं झांकी को देखूं।तन मन सब तो पे वारु,दर्शन को मैं भी तरस रहा,बिहारी जी के द्वार पे,भक्तों … Read more