Hanuman Ashtak in Hindi | हनुमान अष्टक इन हिंदी

हनुमान अष्टक इन हिंदी उन भक्तों के लिए एक उत्तम साधन है, जो भगवान हनुमान की कृपा से अपने जीवन के सभी संकटों से छुटकारा पाना चाहते हैं। इसमें आठ मंत्रात्मक श्लोक होते हैं, जो उनके बल, बुद्धि, और भक्तों के प्रति उनके असीम प्रेम का वर्णन करते हैं। जो लोग जीवन में निरंतर संघर्ष … Read more

Hanuman Chalisa Bhajan | हनुमान चालीसा भजन : श्रद्धा और भक्ति का अनमोल संगम

हनुमान चालीसा भजन ॥दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे।। असुर निकन्दन राम दुलारे॥ अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ सङ्कट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥ ॥दोहा॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

श्री हनुमान चालीसा भजन तुलसीदास जी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध धार्मिक भजन है, जिसका गान हनुमान जी की महिमा को याद करने के लिए और उनको प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस भजन में हनुमान जी के पराक्रम, भक्ति, और चमत्कारों का वर्णन किया गया है। Hanuman Chalisa Bhajan वो मधुर ध्वनि है जो … Read more

Sankat Mochan Hanuman | संकट मोचन हनुमान : कष्ट को दूर करने वाले

संकट मोचन हनुमान का अर्थ है ‘सभी संकटों को दूर करने वाला‘। हनुमानजी को शक्तिशाली देवताओं में से एक माना जाता है, जो भक्तों के सभी दुःख -बाधाओं को दूर करते हैं।  हनुमान जी के चित्रण के बारे में” रामायण महाकाव्य” में विशेष रूप से देखने को मिलता है। हनुमानजी की कृपा से ही भक्त अपने … Read more

हनुमान गायत्री मंत्र इन हिंदी | Hanuman Gayatri Mantra in Hindi : हनुमान कृपा

हनुमान गायत्री मंत्र इन हिंदी ॐ आंजनेयाय विद्मिहे वायुपुत्राय धीमहि , तन्नो: हनुमान: प्रचोदयात। ॐ रामदूताय विद्मिहे कपिराजाय धीमहि, तन्नो: मारुति: प्रचोदयात। ॐ अन्जनिसुताय विद्मिहे महाबलाय धीमहि, तन्नो: मारुति: प्रचोदयात।

हनुमान गायत्री मंत्र हनुमान की उपासना का एक शक्तिशाली और सरल माध्यम है। यह मंत्र न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि आंतरिक शक्ति और साहस को जागृत करने का साधन भी है। Hanuman Gayatri Mantra in Hindi में होने से इसका जाप करना सभी के लिए बहुत ही आसान हो जाता है। इसके जाप … Read more

हनुमान पूजा मंत्र | Hanuman Pooja Mantra : सुख-शांति

Hanuman Pooja Mantra ॐ हं हनुमते नम: यह वाद-विवाद, न्यायालय आदि के लिए प्रयोग किया जा सकता है।  ‘ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट् शत्रु से अधिक भय हो, जान-माल का डर हो, तो यह प्रयोग उचित रहेगा। ‘ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा यदि नित्य यह पाठ किया जाए तो, हनुमान जी के दर्शन सुलभ होते हैं। ‘ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा शत्रु बलवान होने पर यह जप निश्चित लाभ देता है। ‘ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा असाध्य रोगों के लिए इस मंत्र का प्रयोग करें। ‘ॐ नमो भगवते हनुमते नम: सर्व सुख-शांति के लिए यह मंत्र जपें। ‘दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते कठिन कार्यों की सफलता के लिए। और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै इच्छापूर्ति के लिए।

हनुमान पूजा मंत्र  सिर्फ मंत्र नहीं सभी मंत्रों में से एक है जो आध्यात्मिक रहस्यों का खजाना है। यह प्राचीन मंत्र आपके जीवन में  सुख-शांति, सफलता और भक्ति और अध्यात्म से जोड़े रखता है। जो लोग जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह Hanuman Pooja Mantra सहायक सिद्ध होता है। हनुमान जी की … Read more

हनुमान बीज मंत्र इन हिंदी | Hanuman Beej Mantra in Hindi : सकारात्मक ऊर्जा

Hanuman Beej Mantra in Hindi ॐ ऐं भ्रीम हनुमते श्री राम दूताय नमः।

हनुमान बीज मंत्र का उपयोग अध्यात्म कि गहराई को जानने लिए किया जाता है। इस मंत्र का उच्चारण करने से जीवन में शांति मिलती है। Hanuman Beej Mantra in Hindi में होने से कोई भी व्यक्ति इसका पाठ आराम से कर सकता है। इस मंत्र को पूरी श्रद्धा से जपने से भक्तों का जीवन सकारात्मक ऊर्जा … Read more

हनुमान कवच | Hanuman Kavach : भक्तों की रक्षा

श्री हनुमान कवच मंत्र । श्री गणेशाय नम:। ॐ श्री हनुमते नमः। ॐ अस्य श्रीपञ्चमुख हनुमतकवच मंत्रस्य ब्रहमा ऋषि:। गायत्री छंद्: श्रीपञ्चमुख विराट हनुमान देवता ह्रीम बीजम् श्रींम शक्ति:। क्रौ कीलकम्। क्रूं कवचम्। क्रै अस्त्राय फ़ट् । इति दिग्बंध्: श्री गरूड उवाच् अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि श्रुणु सर्वांगसुंदरम्, यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमत्: प्रियम् ।। पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपंच नयनैर्युतम्, बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिध्दिदम् ।। पूर्वतु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम्, दंष्ट्राकरालवदनं भ्रुकुटी कुटिलेक्षणम् ।। अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम्, अत्युग्रतेजोवपुष्पं भीषणम भयनाशनम् ।। पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम्, सर्वनागप्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम् ।। उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दिप्तंनभोपमम्, पाताले सिंह बेतालं ज्वररोगादिकृन्तनम ।। ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम्, येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यमं महासुरम् ।। जघानशरणं तस्यात्सर्वशत्रुहरं परम् । ध्यात्वा पंचमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम् ।। खड्गं त्रिशुलं खट्वांगं पाशमंकुशपर्वतम्, मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुं ।। भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रा दसभिर मुनिपुंगवम् । एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम् ।। प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरण्भुषितम् । दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम ।। सर्वाश्चर्यमयं देवं हनुमद् विश्वतोमुखम् । पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्ण वक्त्रं शशांकशिखरं कपिराजवर्यम् । पीताम्बरादिमुकुटैरूप शोभितांगं पिंगाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि ।। मर्कटेशं महोत्साहं सर्वशत्रुहरं परम् । शत्रुं संहरमां रक्ष श्री मन्नापदमुध्दर ।। ओम हरिमर्कट मर्कट मंत्रमिदं परिलिख्यति लिख्यति वामतले ।। यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं यदि मुंच्यति मुंच्यति वामलता ।। ओम हरिमर्कटाय स्वाहा ओम नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपिमुखाय सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा । ओम नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा । ओम नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिममुखाय गरूडाननाय सकलविषहराय स्वाहा । ओम नमो भगवते पंचवदनाय उत्तरमुखाय आदिवराहाय सकलसंपत्कराय स्वाहा । ओम नमो भगवते पंचवदनाय उर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय सकलजनवशकराय स्वाहा । ॐ अस्य श्री पञ्चमुखहनुमत् मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषि: अनुष्टुपछन्दः पञ्चमुख वीर हनुमान देवता हनुमान इति बीजं वायुपुत्रः इति शक्तिः अंजनी सूत इति कीलकम श्रीरामदूत हनुमत प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ॐ अंजनी सुताए अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । हृदयाय नमः । ॐ रुद्रमूर्तये तर्जने भयाम नमः । शिरसे स्वाहा । ॐ वायु पुत्राये तर्जनीभ्यां नमः । शिखायै वौषट । ॐ अग्निगर्भये अनामिकाभ्यां नमः । कवचाय हुम् । ॐ रामदूताय कनिष्ठिकाभ्यां नमः । नेत्रत्रयाय वौषट । ॐ पंचमुख हनुमते करतलेपृष्ठाभ्यां नमः ।अस्त्राय फट । इदं कवचं पठित्वा तु महाकवचं पठेन्नरः । एकवारं जपे स्त्रोत्रं सर्वशत्रुनिवारणम् ।। द्विवारं तु पठेन्नित्यं पुत्रपौत्रप्रवर्धनम् । त्रिवारं च पठेत नित्यं सर्वसंपत्करं शुभम ।। चतुर्वारं पठेन्नित्यं सर्वरोगनिवारणम् । पञ्चवारं पठेन्नित्यं सर्वलोक वशमकरम् ।। षड्वारं तु पठेन्नित्यं सर्वदेव वशमकरम् । सप्तवारं पठेन्नित्यं सौभाग्यदायकम् ।। अष्टवारं पठेन्नित्यं सर्व अष्टकामार्थसिद्धिदम् । नववारं पठेन्नित्यं सर्वैश्वर्य प्रदायकम् ।। दशवारं च पठेन्नित्यं त्रैलोक्य ज्ञानदर्शनम् । एकादशं पठेन्नित्यं सर्वसिद्धिं लभेन्नरः ।। ।। ओम श्रीपंचमुखहनुमंताय आंजनेयाय नमो नम: ।। ।। श्रीपञ्चमुखी हनुमत्कवच समाप्तं ।।

श्री हनुमान कवच भक्तों को शक्ति और सुरक्षा प्रदान करने वाला एक अद्वितीय पाठ है। जो भगवान हनुमान के प्रति भक्ति और श्रद्धा को  दर्शाता है। Hanuman kavach का पाठ करने से आप अपने जीवन को सकारात्मकता, संतुलित, और समृद्धि बना सकते हैं। इसका पाठ नियमित रूप से सुनने और पढ़ने से भक्तों में आत्मविश्वास बना … Read more

हनुमान शाबर मंत्र इन हिंदी | Hanuman Shabar Mantra in Hindi : सभी समस्याओं का समाधान

हनुमान जाग, किलकारी मार, तू हुंकारे, राम काज संवारे। ओढ़ सिंदूर सीता मैया का, तू प्रहरी राम द्वारे, मैं बुलाऊं ।। तु अब आ, राम गीत तु गाता आ, नहीं आये तो हनुमाना । श्री राम जी ओर सीता मैया कि दुहाई, शब्द साँचा ।। पिंड कांचा, फुरो मन्त्र ईश्वरोवाचा

हनुमान शाबर मंत्र में श्री हनुमान जी के शक्तिशाली मंत्र और टोटकों को एकत्रित किया गया है। यह मंत्र टोटके, तांत्रिक शक्ति को नाश करने के लिए तथा संसार में भूत-पिचाश जैसी बाधाओं को खत्म करके सुख-शांति प्राप्त करने में मदद करता  हैं। Hanuman Shabar Mantra in Hindi में है तो यह आपके पाठ को सरल करता … Read more

Hanuman Dwadash Naam Stotram | हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र : सकारात्मक ऊर्जा

Hanuman Dwadash Naam Stotram !! श्री हनुमानद्वादशनाम स्तोत्र !! हनुमानञ्जनी सूनुर्वायुपुत्रो महाबल: ... ! रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिङ्गाक्षोऽमितविक्रम: !! उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन: ...! लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा !! एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन: ... ! स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत् !! तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत् ... ! राजद्वारे गह्वरे च भयं नास्ति कदाचन !!

हनुमान द्वादश नाम स्तोत्र भगवान हनुमान के बारह पवित्र नामों का संकलन है, जो भक्तों के लिए अति शुभ और फलदायी माना जाता है। यह Hanuman Dwadash Naam Stotram भक्तों के जीवन में साहस, शक्ति, और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। हनुमान जी को हिंदू धर्म में असीम शक्ति, अद्वितीय भक्ति और अटल विश्वास … Read more

हनुमान वडवानल स्तोत्र | Hanuman Vadvanal Stotra : पूजा का महामंत्र

Hanuman Vadvanal Stotra ॥ विनियोग ॥ ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः ! श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं !! मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे ॥ सकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम् ! आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं !! श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये ॥ ॥ ध्यान ॥ मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं ! वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम ! सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय ॥ वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र ! उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र ॥ अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार ! सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद ॥ सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन ! ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःख निवारणाय ॥ ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन ! भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर ॥ चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर ! माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस !! भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ! ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां ॥ ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ! ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां ॥ शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर ! आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय ॥ शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय ! प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन ! परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु ॥ शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय ! नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान् !! यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा ॥ ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते ! राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र ॥ पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय ! नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा ॥

इस हनुमान वडवानल स्तोत्र में विभीषण ने भगवान राम और हनुमान का वर्णन किया हैं। इस स्त्रोत का जाप करने से आप के जीवन के सभी कष्टों का नाश होगा तथा आप खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। यह हनुमान पूजा मंत्र भगवान की कृपा को पाने का एक महामंत्र है। इस स्त्रोत में हनुमान जी … Read more