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संकट मोचन लिरिक्स : एक भक्ति पाठ

संकट मोचन लिरिक्स बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनहुं लोक भयो अंधियारों॥ ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टार॥ देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो॥ चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो॥ कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो॥ जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहां पगु धारो॥ हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो॥ ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो॥ चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो॥ लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो॥ आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो॥ श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो॥ आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो॥ देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो॥ जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो॥ कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो॥ बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥ ॥ दोहा॥ लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर॥ वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥ जय श्रीराम, जय हनुमान, जय हनुमान॥

संकट मोचन लिरिक्स एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावी भक्ति स्तोत्र के बोल है, जिसे भगवान हनुमान की पूजा के रूप में गाया जाता है। Sankat Mochan Lyrics में भगवान हनुमान से जीवन के संकटों से उबारने और सभी प्रकार की कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। संकट मोचन हनुमान अष्टक के बोल आठ … Read more

दुर्गा माँ सांग | Durga Maa Song : माँ की महिमा में रची धुनें

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दुर्गा माँ सांग का भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान है। ये गीत न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देते हैं बल्कि लोगों के मन में माता दुर्गा की शक्ति, करुणा, और सुरक्षा का अहसास भी कराते हैं। जब भी Durga Maa Song गाए या सुने जाते हैं, तो जैसे एक विशेष ऊर्जा और सकारात्मकता … Read more

हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ फोटो | Hanuman Chalisa Lyrics With Photo

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हनुमान चालीसा लिरिक्स विथ फोटो एक अनोखा और लोकप्रिय भक्ति स्तोत्र है, जो भगवान हनुमान के गुण, शक्ति, और उनके अद्वितीय कार्यों का वर्णन तस्वीरों के द्वारा करता है। जब Hanuman Chalisa Lyrics With Photo के साथ होते हैं, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी बढ़ जाता है। यह 40 श्लोकों में विभाजित होता है, … Read more

संकट मोचन हनुमान अष्टक PDF | Sankat Mochan Hanuman Ashtak PDF

Sankat Mochan Hanuman Ashtak Pdf

संकट मोचन हनुमान अष्टक PDF में अष्टक के आठ श्लोक वर्णित है, जो भगवान हनुमान की उपासना में समर्पित हैं। Hanuman Ashtak में भगवान हनुमान के दिव्य रूप, उनके बल, साहस और भक्ति की शक्ति का गुणगान किया गया है, जिसके द्वारा हम हनुमान जी के महत्त्व को आसानी से जान पाते है। यह PDF … Read more

दुर्गा के 108 नाम | Durga Ke 108 Naam: एक लिस्ट में पूरा नाम

durga ke 108 naam सती साध्वी भवप्रीता भवानी भवमोचनी आर्या दुर्गा जया आद्या त्रिनेत्रा शूलधारिणी पिनाकधारिणी चित्रा चंद्रघंटा महातपा मन बुद्धि अहंकारा चित्तरूपा चिता चिति सर्वमंत्रमयी सत्ता सत्यानंदस्वरुपिणी अनंता भाविनी भव्या अभव्या सदागति शाम्भवी देवमाता चिंता रत्नप्रिया सर्वविद्या दक्षकन्या दक्षयज्ञविनाशिनी अपर्णा अनेकवर्णा पाटला पाटलावती पट्टाम्बरपरिधाना कलमंजरीरंजिनी अमेयविक्रमा क्रूरा सुंदरी सुरसुंदरी वनदुर्गा मातंगी मतंगमुनिपूजिता ब्राह्मी माहेश्वरी ऐंद्री कौमारी वैष्णवी चामुंडा वाराही लक्ष्मी पुरुषाकृति विमला उत्कर्षिनी ज्ञाना क्रिया नित्या बुद्धिदा बहुला बहुलप्रिया सर्ववाहनवाहना निशुंभशुंभहननी महिषासुरमर्दिनी मधुकैटभहंत्री चंडमुंडविनाशिनी सर्वसुरविनाशा सर्वदानवघातिनी सर्वशास्त्रमयी सत्या सर्वास्त्रधारिणी अनेकशस्त्रहस्ता अनेकास्त्रधारिणी कुमारी एककन्या कैशोरी युवती यति अप्रौढ़ा प्रौढ़ा वृद्धमाता बलप्रदा महोदरी मुक्तकेशी घोररूपा महाबला अग्निज्वाला रौद्रमुखी कालरात्रि तपस्विनी नारायणी भद्रकाली विष्णुमाय जलोदरी शिवदुती कराली अनंता परमेश्वरी कात्यायनी सावित्री प्रत्यक्षा ब्रह्मावादिनी। अंबे

दुर्गा के 108 नाम भारतीय संस्कृति और धर्म का एक अनमोल खजाना है। देवी दुर्गा को अनेक रूपों में पूजा जाता है, और उनके हर रूप के पीछे एक विशेष अर्थ और ऊर्जा है। Durga Ke 108 Naam का उल्लेख न केवल उनके दिव्य गुणों और शक्तियों को प्रकट करता है, बल्कि यह हमारे जीवन … Read more

दुर्गा कवच PDF | Durga Kavach PDF : दिव्य भक्ति साधन

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दुर्गा कवच पीडीएफ एक ऐसा भक्ति स्रोत है जिसमे दुर्गा कवच जो की हिंदू धर्म में एक अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली रक्षा कवच है, का उल्लेख किया गया है। यह देवी दुर्गा के वरदान से उत्पन्न हुआ एक अद्भुत मंत्र है, जो उनके भक्तों को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। इंटरनेट पर … Read more

दुर्गा कवच लिरिक्स | Durga Kavach Lyrics : सम्पूर्ण गान्य सामग्री

Durga Kavach Lyrics ॥अथ श्री देव्याः कवचम्॥ ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम् श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः ॥ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच ॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम् यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ब्रह्मोवाच अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम् देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥ न तेषां जायते किंचित शुभं रणसंकटे नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥ यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥ प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना ऐन्द्री गजसमारुढा वैष्णवी गरुडासना॥ माहेश्‍वरी वृषारुढा कौमारी शिखिवाहना लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥ श्‍वेतरुपधरा देवी ईश्‍वरी वृषवाहना ब्राह्मी हंससमारुढा सर्वाभरणभूषिता॥ इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥ दृश्यन्ते रथमारुढा देव्यः क्रोधसमाकुलाः शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥ खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥ दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै॥ नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥ त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥ दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥ उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥ एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः॥ अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥ मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥ शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी॥ नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥ दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥ कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥ नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी स्कन्धयोः खङ्‍गिनी रक्षेद् बाहू मे वज्रधारिणी॥ हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुलीषु च नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्‍वरी॥ स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥ नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी॥ कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥ गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥ नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा॥ रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी॥ पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥ शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥ प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम् वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥ रसे रुपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी सत्त्वं रजस्तमश्‍चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥ आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥ गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥ पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥ रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥ पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥ तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम् परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥ निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥ इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम् यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥ दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः॥ नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥ अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः॥ सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः॥ ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः॥ नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्॥ यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥ यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम् तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥ देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम् प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥ लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥ ॥इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्॥

दुर्गा कवच लिरिक्स एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र मंत्र है, जिसे देवी दुर्गा की शक्ति की रक्षा करने वाले कवच के रूप में माना जाता है। यह Durga Kavach Lyrics देवी दुर्गा के दिव्य रूप और उनके संरक्षण की शक्ति का आह्वान करता है। हिन्दू धर्म में दुर्गा कवच को विशेष रूप से रक्षात्मक मंत्र … Read more

दुर्गा चालीसा आरती | Durga Chalisa Aarti : सम्पूर्ण आरती संग्रह

Durga Chalisa Aarti नमो नमो दुर्गे सुख करनी नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥१॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना पालन हेतु अन्न-धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ब्रह्मा-विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा परगट भई फाड़कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर-खड्ग विराजै जाको देख काल डर भाजै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत तिहुंलोक में डंका बाजत॥ शुंभ-निशुंभ दानव तुम मारे रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ रूप कराल कालिका धारा सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संतन पर जब जब भई सहाय मातु तुम तब तब॥ अमरपुरी अरु बासव लोका तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें दुःख-दरिद्र निकट नहिं आवें॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को काहु काल नहि सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो शक्ति गई तब मन पछितायो॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें रिपू मुरख मौही डरपावे॥ शत्रु नाश कीजै महारानी सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला। जब लगि जिऊं दया फल पाऊं तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै सब सुख भोग परमपद पावै॥ देवीदास शरण निज जानी करहु कृपा जगदम्बा भवानी॥ दुर्गा माता की जय… दुर्गा माता की जय… दुर्गा माता की जय

दुर्गा चालीसा आरती हमारे हिंदू धर्म में मां दुर्गा की भक्ति का एक अनमोल हिस्सा हैं। ये न केवल आस्था और श्रद्धा को प्रकट करते हैं, बल्कि हमें देवी दुर्गा की दिव्य ऊर्जा से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं। Durga Chalisa Aarti के 40 चौपाइयों में मां के नौ रूपों की महिमा का गुणगान … Read more

दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa : एक अद्भुत शक्ति और श्रद्धा का प्रतीक

दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥1॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी, तिहूं लोक फैली उजियारी॥2॥ शशि ललाट मुख महाविशाला, नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥3॥ रूप मातु को अधिक सुहावे, दरश करत जन अति सुख पावे॥4॥ तुम संसार शक्ति लै कीना, पालन हेतु अन्न धन दीना॥5॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला, तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥6॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी, तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥7॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें, ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥8॥ रूप सरस्वती को तुम धारा, दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥9॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा, परगट भई फाड़कर खम्बा॥10॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो, हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥11॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं, श्री नारायण अंग समाहीं॥12॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा, दयासिन्धु दीजै मन आसा॥13॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी, महिमा अमित न जात बखानी॥14॥ मातंगी अरु धूमावति माता, भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥15॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी, छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥16॥ केहरि वाहन सोह भवानी, लांगुर वीर चलत अगवानी॥17॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै, जाको देख काल डर भाजै॥18॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला, जाते उठत शत्रु हिय शूला॥19॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत, तिहुंलोक में डंका बाजत॥20॥ शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे, रक्तबीज शंखन संहारे॥21॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी, जेहि अघ भार मही अकुलानी॥22॥ रूप कराल कालिका धारा, सेन सहित तुम तिहि संहारा॥23॥ परी गाढ़ संतन पर जब जब, भई सहाय मातु तुम तब तब॥24॥ अमरपुरी अरु बासव लोका, तब महिमा सब रहें अशोका॥25॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी, तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥26॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें, दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥27॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई, जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥28॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी, योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥29॥ शंकर आचारज तप कीनो, काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥30॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को, काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥31॥ शक्ति रूप का मरम न पायो, शक्ति गई तब मन पछितायो॥32॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी, जय जय जय जगदम्ब भवानी॥33॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा, दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥34॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो, तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥35॥ आशा तृष्णा निपट सतावें, रिपू मुरख मौही डरपावे॥36॥ शत्रु नाश कीजै महारानी, सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥37॥ करो कृपा हे मातु दयाला, ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥38॥ जब लगि जिऊं दया फल पाऊं, तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥39॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै, सब सुख भोग परमपद पावै॥40॥ देवीदास शरण निज जानी, करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥41॥ ॥ॐ॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥ॐ॥

दुर्गा चालीसा, माँ दुर्गा की महिमा और उनकी कृपा का गान करने वाला एक पवित्र ग्रंथ है। यह 40 छंदों का संग्रह है, जो न केवल देवी की स्तुति करता है, बल्कि भक्तों के मन को शक्ति, साहस और विश्वास से भी भर देता है। भारत में Durga Chalisa विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान … Read more

गायत्री मंत्र | Gayatri Mantra : शक्ति और साधना का अद्भुत स्रोत

Gayatri Mantra ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

गायत्री मंत्र को हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली और पवित्र मंत्रों में से एक माना जाता है। यह मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव का स्रोत है जो हमारे मन, मस्तिष्क, और आत्मा को जागृत करने की शक्ति रखता है। वेदों में इसका उल्लेख है और इसे स्वयं ब्रह्मांड की … Read more