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30+Durga Ji Wallpaper | दुर्गा जी वॉलपेपर: श्रद्धा और शक्ति का प्रतीक

दुर्गा जी वॉलपेपर एक अद्भुत और आकर्षक दृश्य है, जो घर, कार्यालय या किसी भी अन्य स्थान की सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ भक्तों के दिलों में श्रद्धा और भक्ति का संचार करता है। Durga Ji Wallpaper न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि वे मानसिक शांति और सकारात्मकता भी प्रदान करते हैं। … Read more

मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै॥ ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते। दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः, सवर्स्धः स्मृता मतिमतीव शुभाम् ददासि। दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिक, मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।

Durga Ji Ka Mantra | दुर्गा जी का मंत्र : शक्ति और भक्ति का अद्भुत साधन

दुर्गा जी का मंत्र एक दिव्य ध्वनि है, जो भक्तों को माँ दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम बनता है। Durga Ji Ka Mantra शक्ति, साहस और सुरक्षा का प्रतीक होता है, और इसे देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करते समय पढ़ा जाता है।माँ दुर्गा का मंत्र न केवल भक्ति … Read more

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Durga Stuti PDF | दुर्गा स्तुति PDF : शक्ति और भक्ति का अद्वितीय स्रोत

आज की डिजिटल दुनिया में, दुर्गा स्तुति PDF फाइल्स ने इस अनमोल भक्ति प्रक्रिया को और भी आसान बना दिया है। अब आपको पुस्तकें ढूंढने या याद करने की चिंता नहीं है। बस एक क्लिक पर दुर्गा स्तुति की सभी प्रार्थनाएँ आपके पास उपलब्ध हैं। Durga Stuti PDF न केवल पढ़ने में आसान है, बल्कि … Read more

दुर्गा माँ का स्तोत्र जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे, जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे। जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे जय पावकभूषितवक्त्रवरे, जय भैरवदेहनिलीनपरे जय अन्धकदैत्यविशोषकरे। जय महिषविमर्दिनि शूलकरे जय लोकसमस्तकपापहरे, जय देवि पितामहविष्णुनते जय भास्करशक्रशिरोवनते। जय षण्मुखसायुधईशनुते जय सागरगामिनि शम्भुनुते, जय दु:खदरिद्रविनाशकरे जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे। जय देवि समस्तशरीरधरे जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे, जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिव। एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:, गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा.

Durga Stotra | दुर्गा स्तोत्र: भक्ति और शक्ति का अद्वितीय संगम

दुर्गा स्तोत्र एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली भक्ति गीत है, जो देवी दुर्गा की महिमा और उनके असंख्य रूपों की वंदना करता है। Durga Stotra विशेष रूप से उन भक्तों द्वारा गाया या पाठ किया जाता है, जो माँ दुर्गा से आशीर्वाद और शक्ति की प्राप्ति चाहते हैं। इस स्तोत्र में देवी दुर्गा के विभिन्न … Read more

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Durga Mata Songs Download | दुर्गा माता सॉंग्स डाउनलोड: भक्ति और शांति का अनुभव

दुर्गा माता सॉंग्स डाउनलोड करके माँ की भक्ति करना आज के युग में सामान्य हो गया है। यें भजन भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं, जो भक्तों के दिलों में श्रद्धा और भक्ति का संचार करते हैं। अगर आप भी माँ दुर्गा के भजनों के प्रेमी हैं, तो Durga Mata Songs Download आपके लिए एक … Read more

आरती ॐ जय अम्बे गौरी जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी, तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी। ॐ जय अम्बे गौरी मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को, उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको। ॐ जय अम्बे गौरी कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै, रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै। ॐ जय अम्बे गौरी केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी, सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी। ॐ जय अम्बे गौरी कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती, कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती। ॐ जय अम्बे गौरी शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती, धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती। ॐ जय अम्बे गौरी चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे, मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे। ॐ जय अम्बे गौरी ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी, आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी। ॐ जय अम्बे गौरी चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों, बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू। ॐ जय अम्बे गौरी तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता, भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता। ॐ जय अम्बे गौरी भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी, मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी। ॐ जय अम्बे गौरी कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती, श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती। ॐ जय अम्बे गौरी श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे, कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे। ॐ जय अम्बे गौरी जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ॥

Durga Devi Aarti | दुर्गा देवी आरती: माँ दुर्गा का भक्तिपूरित गान

दुर्गा देवी आरती हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। Durga Devi Aarti माँ दुर्गा की महिमा, शक्ति और अनंत कृपा का स्तवन करती है। माँ दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है, जो सभी बुराइयों और असत्य से निपटने में सक्षम हैं। देवी दुर्गा की आरती विशेष रूप से उन भक्तों के … Read more

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Maa Durga Ringtone | माँ दुर्गा रिंगटोन: शक्ति और आस्था का प्रतीक

माँ दुर्गा रिंगटोन आजकल स्मार्टफोन के जरिए हर भक्त की ज़िंदगी में एक खास स्थान बना चुकी है। Maa Durga Ringtone माँ दुर्गा की महिमा और उनके आशीर्वाद का प्रतीक बनकर हर जगह सुनाई देती है। जब भी आपका फोन बजता है, यह रिंगटोन आपको माँ दुर्गा के संरक्षण और शक्ति की याद दिलाती है। … Read more

ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम् श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ ॐ नमश्‍चण्डिकायै ॥मार्कण्डेय उवाच॥ यद्‌गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्, यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह। ब्रह्मोवाच अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्, देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने। प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी, तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्। पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च, सप्तमं कालरात्री च महागौरीति चाष्टमम्। नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः, उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना। अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे, विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः। न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे, नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि। यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां सिद्धि प्रजायते, ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः। प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना, ऐन्द्री गजसमारुढ़ा वैष्णवी गरुड़ासना। माहेश्‍वरी वृषारुढ़ा कौमारी शिखिवाहना, लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया। श्वेतरूपधरा देवी ईश्वरी वृषवाहना, ब्राह्मी हंससमारुढ़ा सर्वाभरणभूषिता। नानाभरणशोभाढ्या, नानारत्नोपशोभिताः। दृश्यन्ते रथमारुढ़ा देव्यः क्रोधसमाकुलाः, शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्। खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च, कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्। दैत्यानां देहनाशाय भक्तानाम अभ्याय च, धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै। महाबले महोत्साहे, महाभयविनाशिनि। त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि , प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता। दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी, प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी। उदीच्यां रक्ष कौबेरी ऐशान्यां शूलधारिणी, ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा। एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना, जया मे चाग्रतः स्तातु विजयाः स्तातु पृष्ठतः। अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता, शिखामेद्योतिनि रक्षेद उमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता। मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी, त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके। शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी, कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी। नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका, अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती। दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठ मध्येतु चण्डिका, घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके। कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला, ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी। नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी, खड्ग्धारिन्यु भौ स्कन्धो बाहो मे वज्रधारिणी। हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुली स्त्था, नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षे नलेश्‍वरी। स्तनौ रक्षेन्महालक्ष्मी मनः शोकविनाशिनी, हृदय्म् ललिता देवी उदरम शूलधारिणी। नाभौ च कामिनी रक्षेद् , गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा। कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी, जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी। गुल्फयोर्नारसिंही च पादौ च नित तेजसी, पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी। नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी, रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा. रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती, अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी। पद्मावती पद्मकोशे कफे चूड़ामणिस्तथा, ज्वालामुखी नखज्वाला अभेद्या सर्वसंधिषु। शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा , अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षमे धर्मचारिणी। प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्, वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना। रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी, सत्त्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा। आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी, यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी। गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके, पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी। पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा, राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता। रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु , तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी। पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रार्थी गच्छति तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम् परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्। निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः, त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्। इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्, यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः। दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येपपराजितः, जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः। नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः, स्थावरं जङ्गमं वापि कृत्रिमं चापि यद्विषम्। आभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले, भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः । सहजाः कुलजा मालाः शाकिनी डाकिनी तथा, अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः। ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः, ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः। नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते, मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्। यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले, जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा। यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्, तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी। देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्, प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः। लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते ॥ॐ॥ इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्

Durga Raksha Kavach | दुर्गा रक्षा कवच: माँ दुर्गा का शक्तिशाली पाठ

दुर्गा रक्षा कवच एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है जो विशेष रूप से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुरक्षा पाने के लिए किया जाता है। Durga Raksha Kavach व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है। यह मंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त है … Read more

पाठ मंत्र ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा, ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा। ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा। ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः ॐ नमः परमात्मने, श्रीपुराणपुरुषोत्तमस्य श्रीविष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्याद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे आर्यावर्तान्तर्गतब्रह्मावर्तैकदेशे पुण्यप्रदेशे बौद्धावतारे वर्तमाने यथानामसंवत्सरे अमुकामने महामांगल्यप्रदे मासानाम्‌ उत्तमे अमुकमासे अमुकपक्षे अमुकतिथौ अमुकवासरान्वितायाम्‌ अमुकनक्षत्रे अमुकराशिस्थिते सूर्ये अमुकामुकराशिस्थितेषु चन्द्रभौमबुधगुरुशुक्रशनिषु सत्सु शुभे योगे शुभकरणे एवं गुणविशेषणविशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ सकलशास्त्र श्रुति स्मृति पुराणोक्त फलप्राप्तिकामः अमुकगोत्रोत्पन्नः अमुक नाम अहं ममात्मनः सपुत्रस्त्रीबान्धवस्य श्रीनवदुर्गानुग्रहतो ग्रहकृतराजकृतसर्व-विधपीडानिवृत्तिपूर्वकं नैरुज्यदीर्घायुः पुष्टिधनधान्यसमृद्ध्‌यर्थं श्री नवदुर्गाप्रसादेन सर्वापन्निवृत्तिसर्वाभीष्टफलावाप्तिधर्मार्थ- काममोक्षचतुर्विधपुरुषार्थसिद्धिद्वारा श्रीमहाकाली-महालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं शापोद्धारपुरस्परं कवचार्गलाकीलकपाठ- वेदतन्त्रोक्त रात्रिसूक्त पाठ देव्यथर्वशीर्ष पाठन्यास विधि सहित नवार्णजप सप्तशतीन्यास- धन्यानसहितचरित्रसम्बन्धिविनियोगन्यासध्यानपूर्वकं च 'मार्कण्डेय उवाच॥ सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः।' इत्याद्यारभ्य 'सावर्णिर्भविता मनुः' इत्यन्तं दुर्गासप्तशतीपाठं तदन्ते न्यासविधिसहितनवार्णमन्त्रजपं वेदतन्त्रोक्तदेवीसूक्तपाठं रहस्यत्रयपठनं शापोद्धारादिकं च किरष्ये/करिष्यामि॥

Durga Path | दुर्गा पाठ: माँ दुर्गा की उपासना का एक महत्वपूर्ण तरीका

दुर्गा पाठ एक प्राचीन और शक्तिशाली भक्ति साधना है, जो विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा और आराधना में किया जाता है। Durga Path भक्तों के लिए उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने का एक माध्यम है। दुर्गा जी के पाठ में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन होता … Read more

श्लोक सर्व मंगल मांगल्ए शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ए त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥ दुर्गा स्तुति लिरिक्स जय जग जननी आदि भवानी, जय महिषासुर मारिणी मां। उमा रमा गौरी ब्रह्माणी, जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां॥ हे महालक्ष्मी हे महामाया, तुम में सारा जगत समाया। तीन रूप तीनों गुण धारिणी, तीन काल त्रैलोक बिहारिणी॥ हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक क सारे काज संवारिणी माँ। जय जग जननी आदि भवानी, जय महिषासुर मारिणी मां॥ शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा कूष्मांडा माँ। स्कंदमाता कात्यायनी माताम, शरण तुम्हारी सारा जहां॥ कालरात्रि महागौरी तुम हो, सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां। जय जग जननी आदि भवानी, जय महिषासुर मारिणी माँ॥ अजा अनादि अनेका एका, आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या। नाम रूप गुण कीर्ति अनंता, गावहिं सदा देव मुनि संता॥ अपने साधक सेवक जन पर, सुख यश वैभव वारिणी मां। जय जगजननी आदि भवानी, जय महिषासुर मारिणी मां॥ दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां, भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां। पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी माँ, जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी माँ॥

Durga Stuti Lyrics | दुर्गा स्तुति लिरिक्स : माँ दुर्गा की महिमा का गान

दुर्गा स्तुति लिरिक्स एक अत्यधिक पवित्र और प्रभावशाली भक्ति गीत है, जिसे विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा और आराधना में गाया जाता है। Durga Stuti Lyrics का पाठ या गायन करते समय भक्तों का मन शांति और श्रद्धा से भर जाता है। यह स्तुति माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन … Read more