शिव पूजा मंत्र शिव स्तुति मंत्र श्री शिवाय नम:। श्री शंकराय नम:। श्री महेश्वराय नम:। श्री सांबसदाशिवाय नम:। श्री रुद्राय नम:। ॐ पार्वतीपतये नम:। ॐ नमो नीलकण्ठाय नम:। शिव मूल मंत्र ॐ नमः शिवाय। शिव रूद्र मंत्र ॐ नमो भगवते रूद्राय। रूद्र गायत्री मंत्र ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय, धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्। शिव नमस्कार मंत्र शम्भवाय च मयोभवाय च नमः, शंकराय च मयस्कराय च नमः, शिवाय च शिवतराय च। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः, सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा, शिवो मे अस्तु सदाशिवोम॥ शिव प्रार्थना मंत्र करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं, श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व, जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥ शिव स्तुति मंत्र ॐ नमो हिरण्यबाहवे हिरण्यवर्णाय हिरण्यरूपाय हिरण्यपतए, अंबिका पतए उमा पतए पशूपतए नमो नमः। ईशान सर्वविद्यानाम् ईश्वर सर्व भूतानाम्॥ ब्रह्मादीपते ब्रह्मनोदिपते ब्रह्मा शिवो अस्तु सदा शिवोहम, तत्पुरुषाय विद्महे वागविशुद्धाय धिमहे तन्नो शिव प्रचोदयात्। महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धिमहे तन्नों शिव प्रचोदयात्॥ नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय, त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी। रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय सदशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः॥ शिव आवाहन मंत्र ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन, तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने, नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने। आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः, नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे। नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय, देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम्। नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च, नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम्, नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम्। सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये।

Shiv Puja Mantra | शिव पूजा मंत्र : दिव्य भक्ति अनुभव

शिव पूजा मंत्र की महिमा और प्रभाव हमारे धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में अत्यधिक महत्व रखती है। शिव की पूजा हमारे मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध और शांति प्रदान करती है। Shiv Puja Mantra का जाप करते समय श्रद्धा और समर्पण का भाव होना अत्यावश्यक है, क्योंकि मंत्रों की शक्ति तभी फलित होती है … Read more

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Happy Durga Puja Wishes | हैप्पी दुर्गा पूजा विशेस: एक शुभकामनाओं का संगम

हैप्पी दुर्गा पूजा विशेस भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाने वाले दुर्गा पूजा के खुशियों को एक दूसरे से बांटने का सबसे अच्छा साधन है। Happy Durga Puja Wishes एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान का प्रतीक होती हैं।यह पर्व माँ दुर्गा की पूजा और उनकी शक्तियों की महिमा का प्रतीक है। इस पर्व … Read more

Shiv Shakti Mantra ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं शिव शक्तियै नमः।

Shiv Shakti Mantra | शिव शक्ति मंत्र : संतुलन और शक्ति का स्रोत

शिव शक्ति मंत्र एक दिव्य धार्मिक मंत्र है जो भगवान शिव और माता शक्ति के सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक है। शिव जो परम शांत और संहार के देवता हैं, और शक्ति, जो सृजन और जीवन का स्रोत हैं, इन दोनों की ऊर्जा का संगम सृष्टि की हर क्रिया में प्रकट होता है। Shiv Shakti Mantra … Read more

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Durga Saptashati Path PDF | दुर्गा सप्तशती पाठ PDF: शक्ति की आराधना का पूर्ण ग्रंथ

दुर्गा सप्तशती पाठ PDF एक अत्यंत प्रभावशाली और शक्ति से भरपूर धार्मिक document फाइल है, जिसे माँ दुर्गा की पूजा के दौरान उपयोग किया जाता है। जो लोग समय या स्थान के कारण नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते, उनके लिए Durga Saptashati Path Pdf एक बेहतरीन विकल्प है। इस PDF … Read more

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Durga 108 Names PDF | दुर्गा 108 नाम PDF: शक्ति आराधना के लिए PDF डाउनलोड

दुर्गा 108 नाम PDF नामों का जाप या पाठ करना अत्यंत फलदायी और आसान तरीका है। Durga 108 Names Pdf के सहायता से आप इन पवित्र नामों का जल्दी स्मरण कर सकते है। दुर्गा के 108 नामों का प्रत्येक नाम माँ दुर्गा की शक्ति, महिमा और उनके विभिन्न रूपों का प्रतीक है। इस PDF के … Read more

ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम् श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ ॐ नमश्‍चण्डिकायै ॥मार्कण्डेय उवाच॥ यद्‌गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्, यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ब्रह्मोवाच अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम् , देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी, तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च, सप्तमं कालरात्री च महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः, उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे, विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥ न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे, नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥ यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां सिद्धि प्रजायते, ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥ प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना, ऐन्द्री गजसमारुढ़ा वैष्णवी गरुड़ासना॥ माहेश्‍वरी वृषारुढ़ा कौमारी शिखिवाहना, लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥ श्वेतरूपधरा देवी ईश्वरी वृषवाहना, ब्राह्मी हंससमारुढ़ा सर्वाभरणभूषिता॥ नानाभरणशोभाढ्या, नानारत्नोपशोभिताः॥ दृश्यन्ते रथमारुढ़ा देव्यः क्रोधसमाकुलाः, शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्। खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च, कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्। दैत्यानां देहनाशाय भक्तानाम अभ्याय च, धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै। महाबले महोत्साहे, महाभयविनाशिनि। त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि, प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥ दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी, प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥ उदीच्यां रक्ष कौबेरी ऐशान्यां शूलधारिणी, ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥ एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना , जया मे चाग्रतः स्तातु विजयाः स्तातु पृष्ठतः॥ अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता, शिखामेद्योतिनि रक्षेद उमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥ मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी, त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥ शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी, कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी॥ नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका, अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥ दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठ मध्येतु चण्डिका, घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके॥ कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला, ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥ नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी, खड्ग्धारिन्यु भौ स्कन्धो बाहो मे वज्रधारिणी॥ हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुली स्त्था, नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षे नलेश्‍वरी॥ स्तनौ रक्षेन्महालक्ष्मी मनः शोकविनाशिनी, हृदय्म् ललिता देवी उदरम शूलधारिणी॥ नाभौ च कामिनी रक्षेद्, गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा॥ कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी, जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी॥ गुल्फयोर्नारसिंही च पादौ च नित तेजसी, पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥ नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी, रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा॥ रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती, अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी॥ पद्मावती पद्मकोशे कफे चूड़ामणिस्तथा, ज्वालामुखी नखज्वाला अभेद्या सर्वसंधिषु॥ शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा, अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षमे धर्मचारिणी॥ प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्, वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥ रसे रूपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी, सत्त्वं रजस्तमश्चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥ आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी, यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥ गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके, पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥ पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा, राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥ रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु, तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥ पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः, कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रार्थी गच्छति॥ तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः, यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम् परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥ निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः, त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥ इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम्, यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥ दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येपपराजितः, जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः॥ नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः, स्थावरं जङ्गमं वापि कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥ आभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले, भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः॥ सहजाः कुलजा मालाः शाकिनी डाकिनी तथा, अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः॥ ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः, ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः॥ नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते, मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्॥ यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले, जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥ यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम् , तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥ देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम् , प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥ लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते ॥ॐ॥ ॥इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्॥

Durga Saptashati Kavach | दुर्गा सप्तशती कवच: देवी दुर्गा का रक्षाकवच

दुर्गा सप्तशती कवच एक शक्तिशाली और धार्मिक पाठ है, जिसे विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा और आराधना के समय पढ़ा जाता है। Durga Saptashati Kavach दुर्गा सप्तशती के 700 मंत्रों में से एक है और इसमें भगवान की रक्षात्मक शक्ति का वर्णन किया गया है। यह कवच भक्तों को शत्रुओं, बुरी शक्तियों, और … Read more

मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे... ॐ प्रजापतये स्वाहा... ॐ इन्द्राय स्वाहा... ॐ अग्नये स्वाहा... ॐ सोमाय स्वाहा... ॐ भूः स्वाहा... ॐ गणेशाय नम: स्वाहा... ॐ गौरियाय नम: स्वाहा... ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा... ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा... ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा... ॐ हनुमते नम: स्वाहा... ॐ भैरवाय नम: स्वाहा... ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा... ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा... ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा... ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा... ॐ शिवाय नम: स्वाहा...

Durga Hawan Mantra | दुर्गा हवन मंत्र: शक्ति और समृद्धि की प्राप्ति का मार्ग

दुर्गा हवन मंत्र का जाप एक अत्यधिक प्रभावी और शक्तिप्रद हवन प्रक्रिया है, जिसे विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा में किया जाता है। Durga Hawan Mantra का उद्देश्य माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करना और उनकी शक्ति से अपने जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। हवन मंत्र के उच्चारण से … Read more

दुर्गा देवी मंत्रम सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते। 1 ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते। 2 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ 3 नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै॥ 4

Durga Devi Mantram | दुर्गा देवी मंत्रम : एक आध्यात्मिक साधना

दुर्गा देवी मंत्रम हमारे मन में शक्ति, साहस का संचार करने वाला एक अदभुत मंत्र है। देवी दुर्गा भारतीय धर्म और संस्कृति में एक प्रमुख स्थान रखती हैं। Durga Devi Mantram का जाप करते समय व्यक्ति को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए, ताकि देवी माँ की कृपा प्राप्त हो … Read more

दुर्गा चालीसा लिखा हुआ नमो नमो दुर्गे सुख करनी,नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ ॥   निरंकार है ज्योति तुम्हारी, तिहूं लोक फैली उजियारी॥२॥   शशि ललाट मुख महाविशाला, नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥३॥   रूप मातु को अधिक सुहावे, दरश करत जन अति सुख पावे॥४॥   तुम संसार शक्ति लै कीना, पालन हेतु अन्न धन दीना॥५॥   अन्नपूर्णा हुई जग पाला, तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ ६॥   प्रलयकाल सब नाशन हारी, तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ ७॥   शिव योगी तुम्हरे गुण गावें, ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ ८ ॥   रूप सरस्वती को तुम धारा, दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ ९ ॥   धरयो रूप नरसिंह को अम्बा, परगट भई फाड़कर खम्बा॥१०॥   रक्षा करि प्रह्लाद बचायो, हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ ११॥   लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं, श्री नारायण अंग समाहीं॥१२ ॥   क्षीरसिन्धु में करत विलासा, दयासिन्धु दीजै मन आसा॥१३ ॥   हिंगलाज में तुम्हीं भवानी, महिमा अमित न जात बखानी॥१४ ॥   मातंगी अरु धूमावति माता, भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥१५॥   श्री भैरव तारा जग तारिणी, छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ १६ ॥   केहरि वाहन सोह भवानी, लांगुर वीर चलत अगवानी॥१७॥   कर में खप्पर खड्ग विराजै, जाको देख काल डर भाजै॥ १८॥   सोहै अस्त्र और त्रिशूला, जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ १९॥   नगरकोट में तुम्हीं विराजत, तिहुंलोक में डंका बाजत॥ २०॥   शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे, रक्तबीज शंखन संहारे॥ २१॥   महिषासुर नृप अति अभिमानी, जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ २२॥   रूप कराल कालिका धारा, सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ २३॥   परी गाढ़ संतन पर जब जब, भई सहाय मातु तुम तब तब॥ २४ ॥   अमरपुरी अरु बासव लोका, तब महिमा सब रहें अशोका॥ २५ ॥   ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी, तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ २६ ॥   प्रेम भक्ति से जो यश गावें, दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥ २७ ॥   ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई, जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥ २८ ॥   जोगी सुर मुनि कहत पुकारी, योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ २९ ॥   शंकर आचारज तप कीनो, काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ ३० ॥   निशिदिन ध्यान धरो शंकर को, काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ ३१ ॥   शक्ति रूप का मरम न पायो, शक्ति गई तब मन पछितायो॥ ३२ ॥   शरणागत हुई कीर्ति बखानी, जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ ३३ ॥   भई प्रसन्न आदि जगदम्बा, दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ ३४ ॥   मोको मातु कष्ट अति घेरो, तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ ३५ ॥   आशा तृष्णा निपट सतावें, रिपू मुरख मौही डरपावे॥ ३६ ॥   शत्रु नाश कीजै महारानी, सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥३७ ॥   करो कृपा हे मातु दयाला, ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥ ३८ ॥   जब लगि जिऊं दया फल पाऊं, तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥ ३९ ॥   दुर्गा चालीसा जो कोई गावै, सब सुख भोग परमपद पावै।   देवीदास शरण निज जानी, करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ ४० ॥   ॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

Durga Chalisa Likha Hua | दुर्गा चालीसा लिखा हुआ: एक आध्यात्मिक शक्ति

दुर्गा चालीसा लिखा हुआ होना सभी भक्तों के लिए एक अच्छा साधन है यह चालीसा 40 श्लोकों से बना होता है, जिसमें माँ दुर्गा के अद्वितीय रूप, उनके शक्तिशाली गुण और विभिन्न शक्तियों का वर्णन किया गया है। Durga Chalisa Likha Hua होने से इसका पाठ करना सभी के लिए आसान हो जाता है और … Read more

दुर्गा बीज मंत्र ॥ ऐं ह्री देव्यै नम: ॥

Durga Beej Mantra | दुर्गा बीज मंत्र : शक्ति और सुरक्षा का महामंत्र

दुर्गा बीज मंत्र एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र मंत्र है, जो देवी दुर्गा की असीम शक्ति और कृपा को प्राप्त करने का साधन माना जाता है। Durga Beej Mantra विशेष रूप से माँ दुर्गा की पूजा और आराधना में अत्यधिक महत्व रखता है। यह मंत्र सुरक्षा, समृद्धि, मानसिक शांति और हर प्रकार के नकारात्मक प्रभाव … Read more