माँ अन्नपूर्णा मंत्र | Annapurna Mantra: समृद्धि और शांति का दिव्य स्रोत

माँ अन्नपूर्णा केवल भोजन और धन की देवी नहीं हैं, बल्कि वे संतोष और आध्यात्मिक ज्ञान की अधिष्ठात्री भी हैं, और माँ अन्नपूर्णा मंत्र का जाप करने से जीवन में धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। Annapurna Mantra का नियमित रूप से उच्चारण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और व्यक्ति के जीवन से अभाव व दरिद्रता दूर होती है।

जो साधक श्रद्धा और विश्वास के साथ इन मंत्रों का जाप करता है, उसे कभी भी अन्न और संसाधनों की कमी नहीं होती। यह मंत्र केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग दिखाते हैं। यदि आप अपने जीवन में समृद्धि और संतोष चाहते हैं, तो नीचे दिए गए Annapurna mata Mantra का नित्य जाप करें और माँ अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करें-

शक्तिशाली माँ Annapurna Mantra

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमाशङ्करी,
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी॥
मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी,
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ – हे माँ कौमारी, जो भगवान भोलेनाथ के साथ पावन कैलाश नगरी में विराजमान हैं, आप मोक्षदायिनी और काशी की अधिष्ठात्री देवी हैं। आप अन्नपूर्णा स्वरूप में समस्त जगत का पालन करती हैं। हे माँ, मेरी विनम्र प्रणाम स्वीकार करें और अपनी कृपा से अपने भक्त को भिक्षा रूप में अन्न व समृद्धि प्रदान करें।

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी,
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी॥
सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी,
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ – योग के आनंद में समाहित, शत्रुओं का नाश करने वाली माँ, आपके आशीर्वाद से लोगों के हृदय में धर्म और आस्था की ज्योति प्रज्वलित होती है। आपके अंदर सूर्य, चंद्रमा और अग्नि की तीनों दिव्य शक्तियां निहित हैं। हे माँ, कृपया मुझे अपना आशीर्वाद दें और मेरे जीवन में अन्न और समृद्धि का वरदान प्रदान करें।

दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी,
लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी॥
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी,
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।।

अर्थ – हे माँ, संपूर्ण ब्रह्माण्ड आपके उदर में स्थित है। आपकी माया के प्रभाव से ही इस सृष्टि का समस्त कार्य चलता है। आप ही विज्ञान की जननी हैं और सभी अविष्कार आपके आशीर्वाद से ही संभव होते हैं। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी अपार कृपा से इस भक्त को अन्न और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी,
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी॥
काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी,
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ – हे माँ, आपने भिन्न-भिन्न प्रकार के रत्नों से जड़े आभूषण पहने हैं और अपने गले में सुंदर मोतियों की माला धारण की है। आपका रूप श्वेत है, और आपके शरीर से केसर और अगर की मनमोहक सुगंध फैल रही है। आप ही काशी नगरी की देवी हैं, जिनके दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी कृपा से बिना किसी विलंब के इस भक्त को अन्न प्रदान करें।

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी,
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी॥
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी,
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ – सभी को सदैव आनंद की अनुभूति देने वाली माँ, आपके एक हाथ में वर मुद्रा है, जो हमारे भय को दूर करता है, और दूसरे हाथ में आशीर्वाद है, जिससे हमें अन्न और समृद्धि प्राप्त होती है। आप हमारे सभी पापों का नाश करने वाली हैं और साक्षात माहेश्वरी हैं। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी कृपा से इस भक्त को अन्न प्रदान करें और उसे आशीर्वादित करें।

Annapurna Mantra

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमाशङ्करी,
 कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी॥
मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी,
 भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ - हे माँ कौमारी, जो भगवान भोलेनाथ के साथ पावन कैलाश नगरी में विराजमान हैं, आप मोक्षदायिनी और काशी की अधिष्ठात्री देवी हैं। आप अन्नपूर्णा स्वरूप में समस्त जगत का पालन करती हैं। हे माँ, मेरी विनम्र प्रणाम स्वीकार करें और अपनी कृपा से अपने भक्त को भिक्षा रूप में अन्न व समृद्धि प्रदान करें।

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी,
 चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी॥ 
सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी,
 भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ - योग के आनंद में समाहित, शत्रुओं का नाश करने वाली माँ, आपके आशीर्वाद से लोगों के हृदय में धर्म और आस्था की ज्योति प्रज्वलित होती है। आपके अंदर सूर्य, चंद्रमा और अग्नि की तीनों दिव्य शक्तियां निहित हैं। हे माँ, कृपया मुझे अपना आशीर्वाद दें और मेरे जीवन में अन्न और समृद्धि का वरदान प्रदान करें।

दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी,
 लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी॥
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी,
 भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी।।

अर्थ - हे माँ, संपूर्ण ब्रह्माण्ड आपके उदर में स्थित है। आपकी माया के प्रभाव से ही इस सृष्टि का समस्त कार्य चलता है। आप ही विज्ञान की जननी हैं और सभी अविष्कार आपके आशीर्वाद से ही संभव होते हैं। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी अपार कृपा से इस भक्त को अन्न और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी,
 मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी॥
 काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी,
 भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ - हे माँ, आपने भिन्न-भिन्न प्रकार के रत्नों से जड़े आभूषण पहने हैं और अपने गले में सुंदर मोतियों की माला धारण की है। आपका रूप श्वेत है, और आपके शरीर से केसर और अगर की मनमोहक सुगंध फैल रही है। आप ही काशी नगरी की देवी हैं, जिनके दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी कृपा से बिना किसी विलंब के इस भक्त को अन्न प्रदान करें।

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी,
 निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी॥ 
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी,
 भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी॥

अर्थ - सभी को सदैव आनंद की अनुभूति देने वाली माँ, आपके एक हाथ में वर मुद्रा है, जो हमारे भय को दूर करता है, और दूसरे हाथ में आशीर्वाद है, जिससे हमें अन्न और समृद्धि प्राप्त होती है। आप हमारे सभी पापों का नाश करने वाली हैं और साक्षात माहेश्वरी हैं। हे माँ अन्नपूर्णा, कृपया अपनी कृपा से इस भक्त को अन्न प्रदान करें और उसे आशीर्वादित करें।

माँ अन्नपूर्णा का नाम लेते ही हमें अन्न, समृद्धि और शांति का आभास होता है। उनके मंत्रों का जाप हमारे जीवन में न केवल भौतिक सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि मानसिक शांति और संतोष भी प्रदान करता है। अन्नपूर्णा मंत्र का नियमित उच्चारण करने से माँ की कृपा से हमारे जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती। यदि आप भी माँ अन्नपूर्णा की असीम कृपा चाहते हैं, तो इन मंत्रों का जाप करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।

मंत्र जाप करने की सरल और प्रभावी विधि

माँ अन्नपूर्णा का मंत्र जाप करते समय कुछ विशेष विधियों का पालन करने से जाप अधिक प्रभावशाली और फलदायी होता है। सही तरीके से मंत्र जाप करने से माँ अन्नपूर्णा की कृपा से जीवन में अन्न, धन, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

  1. स्नान: मंत्र जाप की शुरुआत से पहले शुद्धता आवश्यक है। सुबह-सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। मानसिक और शारीरिक शुद्धता बनाए रखने से आपका मंत्र जाप अधिक प्रभावी होता है।
  2. पूजा स्थल: सभी पूजा सामग्री को व्यवस्थित करें। यदि संभव हो तो एक चौकी पर सफेद या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा या चित्र को प्रतिष्ठित करें और उसके पास दीपक और अगरबत्ती रखें। पूजा स्थल को स्वच्छ और शांत रखें।
  3. दीपक और धूप: माँ अन्नपूर्णा की पूजा शुरू करने से पहले, दीपक और धूप अर्पित करें। यह वातावरण को शुद्ध करता है और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
  4. ध्यान: माँ अन्नपूर्णा का ध्यान करते हुए, शांत मन से Maa Annapurna Mantra का जाप करें। मंत्र का जाप 108 बार या जितना संभव हो, उतना करें।
  5. मानसिक एकाग्रता: जाप करते समय मन को एकाग्रित रखें। हर शब्द का उच्चारण साफ और स्पष्ट करें। मंत्र का अर्थ समझते हुए ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
  6. आशीर्वाद: मंत्र जाप के बाद, माँ अन्नपूर्णा से आशीर्वाद प्राप्त करें और अन्न अर्पित करें। भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण करें और उसे परिवार के सदस्यों में वितरित करें।
  7. धन्यवाद: मंत्र जाप समाप्त होने के बाद, माँ अन्नपूर्णा का धन्यवाद करें और उनकी कृपा का आभार व्यक्त करें। घर में समृद्धि और सुख-शांति की कामना करें।

यह विधि सरल है, लेकिन अगर श्रद्धा और विश्वास से की जाए, तो माँ अन्नपूर्णा की कृपा निश्चित रूप से प्राप्त होती है।

FAQ

इस मंत्र का जाप क्यों करना चाहिए?

इस मंत्र का जाप करने से माँ अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त होती है। यह मंत्र अन्न, धन, समृद्धि और मानसिक शांति को बढ़ावा देता है।

क्या अन्नपूर्णा माता का मंत्र का जाप किसी विशेष दिन करना चाहिए?

क्या इस मंत्र को घर में अकेले किया जा सकता है?

क्या मंत्र का जाप करने के लिए किसी विशेष पूजन सामग्री की आवश्यकता है?

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