Pawan Tera Dwar Hai
भोले हम तेरे दर पे आयेगे चरनो में सिर झुकायेगे,
तू मुझे थाम लेंगा ये इतवार है
पावन तेरा द्वार है,
हो सिर पे है गंगा गले में बुज्न्गा माथे पे चंदा सजाये हुए
तुझको है प्यारी नंगी सवारी
हाथो में डमरू उठाये हुए
कर लिया भस्म से तूने शिंगार है,
पावन तेरा द्वार है,
मांगू न सोना मांगू न चांदी
हमे तेरी भगती प्यारी लगे,
पर्वत के वासी सुन केलाशी छवि सारे जग से न्यारी लगे,
तू मेरा मैं तेरा बस ये इकरार है,
पावन तेरा द्वार है,
हो अविनाश आके सिर को जुका के तेरा नाम लेकर गाने लगा है,
अब तो बिसरियां मेरी ये नैया खुद मेरा शंकर चला ने लगा है,
बिन तेरे कुछ नही सुना संसार है,
पावन तेरा द्वार है,

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile