Bada Hi Pavan Hai Man Bhawan
बड़ा ही पावन , है मन भावन श्रावण का सोमवार है,
कालो के ये ,वो महाकाल है पूजे जिन्हें संसार है,
मस्तक पर है चंद्रमा , बहे गंगा की धारा,
तन पे भस्मी रमाये है , पहने बाघम्बर प्यारा
सर्पो का हार है , दिव्य श्रंगार है
कानो में बिछु के कुंडल , हाथो में डमरू की ढमकार,
बड़ा ही पावन , है मन भावन….
खोल खजाने बेठे है , मेरे महाकाल सरकार
मांगना है जो माँगलो , है जिनको जो दरकार
शिव भोले दानी है , दुनिया दीवानी है
दिलबर शैलू को संग ले , आया आज तेरे दरबार
बड़ा ही पावन , है मन भावन….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile