Mor Bhangiya Ka Manai De O Bhero Nath
मोर भंगिया का मनाई दे ओ भेरो नाथ
मोर जोगियां का मनाई दे बातमोरी बिगड़ी बनाई दे,
मोर भंगिया का मनाई दे ओ भेरो नाथ
तेरे द्वार जो भी आये मन चाहा फल पा जाए
शंकर का प्यारा है तू दुखियो का सहारा है तू
तेरी कही सुनते है बाबा शिव पे चड़े तेरा चडावा भोला से हम को मिलाई दे,
मोर भंगिया का मनाई दे ओ भेरो नाथ
भाघ्म्भर तन पर सोहे नाग की माला मन को मोहे
अंग भभूत बैल सवारी कर त्रिशूल डमरू धारी,
चडती है बेल के पाती भले बुरे सब के साथी,
इक बार दर्श दिखाई दे
मोर भंगिया का मनाई दे ओ भेरो नाथ
गंगा जल देवो के देवा
राजी हो करते है सेवा
तीजा नयन जब जब खोले तीनो लोक डगमग डोले,
भगतो को तार दिया है जग के लिए जेहर पिया है,
थोडा सा उनको जगाई दे भेरो नाथ
मोर भंगिया का मनाई दे ओ भेरो नाथ

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile