Chada Kar Shiv Bhole Ki Bhang
आरे चल रे कवाडिया तू कावड़ उठाये के
कावड उठाइ के ठुमका लगाई के
भोले के गीत पर डी जे की बीट पर,
ऐसा मचा दे हुडधंग,
चड़ा कर शिव भोले की भंग
काँधे पे जिसके हो गंगा का पानी
शंकर के भगतो की ये है निशानी
बम भोले बम भोले का जाप करते
लाते ये कावड डाक और तूफानी
चलते चले है याहा रुके है,
वही जमा ते ऐसा रंग
चड़ा कर शिव भोले की भंग
भोले बाबा के भजन गा रहे है
अपनी ही धुन में चले जा रहे है
पावो के छालो को दे कर के चकमा
शिव के सहारे बड़े जा रहे है
ना ही ये थक ते हिमत है रखते
दिल में जगा के ये उमंग
चड़ा कर शिव भोले की भंग
शरदा से जो भी ये कावड उठाये
भोले के भगतो की गिनती में आये,
जो भाव केवल के मन में आये
गा कर वही सोनू राना सुनाये
जब ये बजेगा जो भी सुनेगा मस्ती में होगा वो मलंग
चड़ा कर शिव भोले की भंग

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile