Meri Manjil Ne Paar Lagaiye
काँधे कावड उठा ली भोले मन में दर लिया ध्यान तेरा
मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा
धनी दिन से सोचु था मैं हरी द्वार ने आवन ने
मन मेरा भी तडपे गा गंगा में घोटे लावन ने
भोला भाला जमीदार सु हरियाने में गाव मेरा
मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा
म्हारे गाव के मंदिर में हो बाबा तने नुहाउगा
धिस धिस चन्दन करू कटोरी माथे चन्दन लगाऊ गा
धुप दीप से करू आरती फिर गाऊ गुण गान तेरा
मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा
लाडू पेडे खावे को न आक धतुरा ल्याऊ गा
काची काची भांग घोट के भर भर लोटे पिलाउगा
तू ही मेरा मात पिता है तू ही है भगवान मेरा
मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा
इतनी सुन के टेर जाट की प्रशन हो गे बम भोले
हरयाने के खेता में फिर बरसे चांदी गोले
तेरी जय हो ओहगडदानी दिनेश करे गुणगान तेरा
मेरी मंजिल ने पार लगाइये मनाऊ गा एहसान तेरा

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile