Chahe Gale Main Nag
चाहे तू तन पे भस्म रमा ले
चाहे गले में नाग फसा ले,
चाहे तू तन पे भस्म रमा ले
तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा
हो गा तू योगी होगा मधारी
भोले तो से प्रीत लगा ली
दूंगी मैं हाथो में हाथ तू मुझको ही व्याहेगा
तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा
मेहल हवेली न चाहू गी जंगल में तेरे संग रेह लुंगी
खा लुंगी मैं चुप चाप जो प्यार से खिलायेगा
तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा
भोले तुझ संग प्रीत लगाई प्यार की तोसे रीत निभाई,
जन्मो का है सार ये प्यार से निभ जाएगा
तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile