Hey Shiv Shankar Bhakti Ki Jyoti Ab To Jala Do Man Me
है शिव शंकर भक्ति की ज्योति
अब तो जला दो मन में।
राग द्वेष से कलुषित ये मन।
उज्ज्वल हो पल छिन में।।
तेरी डमरू से निकले है
ओमकार स्वर प्रतिपल ।
मै रम जाऊँ तुझमे भगवन
तूँ रम जा नैनन में।।
है शिव……….
भस्म रमाये तन पे तूँ क्यों
इसका राज बतादो।
बीत गये कुछ अब न बीते
बाकी क्षण बातन में।।
है शिव……….
किसका ध्यान धरे कैलाशी
इसका ज्ञान अमर दो ।
तूँ है या फिर ध्यान धरे जो
वो बैठा कण कण में।।
है शिव……..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile