हे शिव शंकर भक्ति की ज्योति अब तो जला दो मन में

Hey Shiv Shankar Bhakti Ki Jyoti Ab To Jala Do Man Me

है शिव शंकर भक्ति की ज्योति
अब तो जला दो मन में।
राग द्वेष से कलुषित ये मन।
उज्ज्वल हो पल छिन में।।

तेरी डमरू से निकले है
ओमकार स्वर प्रतिपल ।
मै रम जाऊँ तुझमे भगवन
तूँ रम जा नैनन में।।
है शिव……….

भस्म रमाये तन पे तूँ क्यों
इसका राज बतादो।
बीत गये कुछ अब न बीते
बाकी क्षण बातन में।।
है शिव……….

किसका ध्यान धरे कैलाशी
इसका ज्ञान अमर दो ।
तूँ है या फिर ध्यान धरे जो
वो बैठा कण कण में।।
है शिव……..

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