Gora Bhang Gotde
रे गोरा रिम झूम पड़े फुहार यो मस्त महीना सावन का,
रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का
ठंडी ठंडी पवन चले बिन भांग धटा न जावे
काची काची भांग देख मेरी भूख बड ती जावे
रे गोरा मिल जा तने परनाम देख ले मने सतावन का
रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का
मैं और किसी का लाडा न बस भांग का घना सवादु
घोटन ने अरे और घोटे रे पर तेरे हाथ में जादू
हे गोरा कौन सा करु उपाए बता दे तने मनावन का
रे जल्दी रगड़े क्यों न भांग खिलेगी मूड बनावन का

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile