Mere Man Vina Ke Taar Jape
मेरे मन वीणा के तार जपें,
जय जय भोले भंडारी प्रभु,
अब कर दो कृपा हे शिव शंकर,
हम आये शरण तिहारी प्रभु,
मेरे मन वीणा…..
भाये डम डम डम तेरा डमरू,
चारों दिशा में तू मेरे ह्रदये में तू,
अपने भक्तों में कर डालो,
अब तो गिनती तुम हमारी प्रभु॥
मेरे मन वीणा…..
तुम हो नाथों के नाथ प्रभु,
मिलता रहे तेरा साथ प्रभु,
मुझको भी उबारो हे भोले,
तारी है सृष्टि सारी प्रभु॥
मेरे मन वीणा…..
तेरी जटा में गंगा का पानी,
पानी मे शक्ति है रूहानी,
जय जय गंगे हर हर गंगे,
जपते है सब नर नारी प्रभु॥
मेरे मन वीणा…..
कर में त्रिशूल गले सर्प माला,
है रूप तेरा भोला भाला,
तेरे शीश का चन्दा हर लेता,
हर मन की पीड़ा सारी प्रभु॥
मेरे मन वीणा…..
तेरे दर के सिवा कुछ ना सूझे,
कहता है “श्याम” अपना लो मुझे,
सुखों का सवेरा बख्शो करो,
दूर रात गमों की अंधयारी प्रभु॥
मेरे मन वीणा…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile