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जगत के रंग क्या देखूं

Jagat Ke Rang Kya Dekhu

जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,
क्यों भटकूँ गैरों के दर पे, के शिव का द्वार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,
तेरा दीदार काफी है..
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है।

नज़ारे और दुनिया के, मेरी आँखों को ना भाये,
नज़ारे और दुनिया के, मेरी आँखों को ना भाये,
मेरी आँखों को ना भाये…
तेरी मूरत, तेरा दर्शन, तेरा श्रृंगार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत के साज बाजों से, हुए हैं कान अब बहरे,
जगत के साज बाजों से, हुए हैं कान अब बहरे,
हुए हैं कान अब बहरे..
कहाँ जाके सुनूँ सुमिरन, मधुर शिव नाम काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का,
जगत के रिश्तेदारों ने, बिछाया जाल माया का,
बिछाया जाल माया का..
तेरे भक्तों से हो प्रीति, के शिव परिवार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है॥

जगत की झूठी रौनक से, हैं आँखें भर गयी मेरी,
जगत की झूठी रौनक से, हैं आँखें भर गयी मेरी,
हैं आँखें भर गयी मेरी…
चले आओ मेरे भोले, दर्श की प्यास काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है,
जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दीदार काफी है………

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