Hey Mere Shankra
तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा,
तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा……
खाने को है कंद मूल पीने को भंग है,
उड़ते रहते है बार बार बारी के तरंग है…-2
कानो में कुण्डल सुन्दर सोहे, गले नाग की माला शंकरा हे मेरे शंकरा,
तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा………
हाथो में त्रिशूल सोहे मस्तक पर चंद्र है
पहने है मृग छाला भोले नील कंठ रंग है….-2
गौरी संग में साथ गणपति, रहते है कैलाशा शंकरा हे मेरे शंकरा,
तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile