Bhola Sang Bhavar Mat Dare
मैं बार बार समझाऊं लली री,
भोला संग भावर मत डारे…
वाके माथे पर चंदा सोहै,
तू चमक देख डर जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वाके जटा बीच गंगा सोहै,
तू नहात नहात मर जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वाके गले में नागों की माला,
तू डरत डरत मर जाए लली रे भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वाके हाथों में डमरू सोहै,
तू नाच नाच थक जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
भोला पर्वत को वासी है,
तू चढ़ात चढ़त थक जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वह तो भांग धतूरा खाता है,
तू घोट घोट मर जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वाके खाने को ना पीने को,
वापे औड़न को ना पहरान को,
भूखी प्यासी मर जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….
वह तो करता नंदी सवारी है,
तू घुमत घुमत मर जाए लली री भोला संग भावर मत डारे,
मैं बार बार समझाऊं लली री….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile