Mahashivratri Parv Hai Pavan
महाशिवरात्रि पर्व है पावन,
सुख दायी फल दायी,
कथा सुनी व्रत करके जिसने,
मोक्ष की सीढ़ी पायी,
महाशिवरात्रि पर्व है पावन……….
दूरतरीहू नाम का एक भील था,
घोर पापी व्यभिचारी,
मार मृगो को जीवन यापन करता था वो शिकारी,
स्वजन थे भूखे लाओ कोई मर का कोई शिकार,
दुष्कर्मो से चला रहा था वो अपना संसार……..
दिन भर भटका कोई ना पाया शिकारी,
ठक कर हर व्याध विचार,
क्या कर्ता लचारी……….
हुआ अँधेरा चड़ा पेड़ पर रात बिताने सारी,
प्यास बुझाने साथ में अपने ये जल भर कर,
महाशिवरात्रि पर्व है पावन………
बिल्वा के उस तरुवर के नीच,
था शिव लिंग पुराण,
चुपके से पत्तो में बैठा साध निशान,
रात के प्रहार में आई पीने पानी,
तीर चलाकर धारा सही करदो ये व्यध ने थानी,
ज्यो ही तीर चडाकर खीची धनुष कामण,
पानी गिर हुआ अभिषेक और लिंग पर पाटी,
प्रथम प्रहार पर शिव भील की आंख खुल,
पापी जीव को अंजनी शिव भक्ति की राह मिली,
महाशिवरात्रि पर्व है पावन……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile