Chhoti Si Gaura Chali Shiv Ko Manane
जय शिव शंकर भोले शंकर…
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को
निर्जल तन से निश्छल मन से,
निर्जल तन से निश्छल मन से,
निर्जल तन से निश्छल मन से,
निर्जल तन से निश्छल मन से,
नित वंदन करती थी लगन से,
नित वंदन करती थी लगन से,
निर्जल तन से निश्छल मन से,
नित वंदन करती थी लगन से,
लेके उपवन से फूल और माला चली है शिव को सजाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को।
नित गंगा तट पर जाती है,
नित गंगा तट पर जाती है,
नित गंगा तट पर जाती है,
नित गंगा तट पर जाती है,
भर के लौटा जल लाती है,
भर के लौटा जल लाती है,
नित गंगा तट पर जाती है,
भर के लौटा जल लाती है,
और लाती है भांग धतूरा देखो शिव को रिझाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को।
रोज एक ही अरज लगाती,
रोज एक ही अरज लगाती,
रोज एक ही अरज लगाती,
रोज एक ही अरज लगाती,
शिव को पति रूप में पाती,
शिव को पति रूप में पाती,
रोज एक ही अरज लगाती,
शिव को पति रूप में पाती,
चले कुर्मी अमन और केशव भी अपने अर्जी लगाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को।
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
शिव को मनाने को शिव को रिझाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को,
मेरी छोटी सी प्यारी सी गौरा चली है शिव को मनाने को……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile