Rom Rom Me Rum Raha
रोम रोम में रम रहा,
कण कण में तू बस रहा,
रोम रोम में रम रहा,
कण कण में तू बस रहा…
तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,
रोम रोम में रम रहा,
कण कण में तू बस रहा…
अग्नि की तू है अगन,
जल की तू है शीतलता,
सूरज में तेरी तपन,
चांदनी में तू चमक रहा,
नदियां चलें है तेरी धारा,
सागर तुझसे बह रहा,
रोम रोम में रम रहा,
कण कण में तू बस रहा,
तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,
रोम रोम में रम रहा……
फूलो में खुशबू तेरी,
श्रृंगार में है रस तेरा,
मोती माला कुंडल देखो बखान तेरा गा रहा,
अधभूत रूप निराला तेरा,
दर्शन देखो दे रहा,
रोम रोम में रम रहा,
कण कण में तू बस रहा,
तेरी शक्ति से ही देखो संसार सारा चल रहा,
रोम रोम में रम रहा……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile