Bin Piye Nasha Ho Jata Hai
बिन पिये नशा हो जाता है,
जब सूरत देखू भोले की…
उसके शीश पे चंदा विराज रह्या,
चंदा की चांदनी में खो जाऊ,
जब सूरत देखू भोले की,
बिन पिये नशा हो जाता है,
जब सूरत देखू भोले की…
उसके गले में नाग विराज रह्या,
नागा की लहर में खो जाऊ,
जब सूरत देखू भोले की,
बिन पिये नशा हो जाता है,
जब सूरत देखू भोले की…
उसके हाथ में डमरू विराज रह्या,
डमरू की ताल में खो जाऊ,
जब सूरत देखू भोले की,
बिन पिये नशा हो जाता है,
जब सूरत देखू भोले की…..
उसके पैरो में घुंघरू विराज रहे,
घुंघरू की ताल में खो जाऊ,
जब सूरत देखू भोले की,
बिन पिये नशा हो जाता है,
जब सूरत देखू भोले की……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile