Main Tumko Shish Navata Hoon
जहाँ पवन बहे संकल्प लिए,
जहाँ पर्वत गर्व सीखातें हैं,
जहाँ ऊँचे नीचे सब रस्ते,
भक्ति के सुर में गाते हैं….
उस देवभूमि के ध्यान से,
मै धन्य धन्य हो जाता हूँ,
उस देवभूमि के ध्यान से,
मै धन्य धन्य हो जाता हूँ,
है भाग्य मेरा सौभाग्य मेरा,
मै तुमको शीश नवाता हूँ….
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
हो जाता हूँ, हो जाता हूँ….
मांडवे की रोटी और हुड़के की थाप,
हर एक मन करता शिवजी का जाप,
ऋषि मुनियों की है ये तपोभूमी,
इतने वीरों की ये जन्मभूमी….
तुम आँचल हो भारत का,
जीवन की धूप में छाँव तुम….
तुम आँचल हो भारत का,
जीवन की धूप में छाँव तुम,
बस छूने से तर जाए,
सबसे पवित्र वो पाँव हो तुम….
बस लिए समर्पण तन मन से,
मै देवभूमी में आता हूँ,
है भाग्य मेरा सौभाग्य मेरा,
मै तुमको शीश नवाता हूँ…
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
और धन्य धन्य हो जाता हूँ,
हो जाता हूँ, हो जाता हूँ…….
है भाग्य मेरा सौभाग्य मेरा,
मै तुमको शीश नवाता हूँ,
मै तुमको शीश नवाता हूँ……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile