Parvat Pe Aaja Meri Gaura
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
मेरे ते प्यारी गंगा तन्ने,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
गंगा मेरी जटा की शोभा स,
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
मेरे ते प्यारा चाँद तन्ने,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
चंदा मस्तक की शोभा स,
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी…..
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
ये सरप मेरे ते प्यारे स,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
ये सरप गले की शोभा स,
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी….
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
मेरे ते प्यारा डमरू स,
डमरू मेरे हाथ की शोभा स,
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी…..
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
मेरे ते प्यारा नंदी स,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
या नंदी मेरी असवारी स,
पर्वत पे आजा मेरी गौरा,
क्यों देखे गौरा खड़ी खड़ी…..
मैं कैसे आऊं मेरे भोले,
मेरे ते भगत तन्ने,
तू तो पगली होइ मेरी गौरा,
भगता ने दर्शन दोनों देवा,
आपां दोनों संकट काटा,
पहाड़ा पर बैठ के भजन करा,
मैं इब आऊं मेरे भोले,
मैं तो बहम करूँ थी खामखा,
मन्ने लगे तन्ने स प्यार घणा,
ईब लगे तन्ने स प्यार घणा…

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile