Shiv Hi Base Hai Kan Kan Me
शिव ही बसे हैं कण-कण में, केदार हो या काशी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण-कण में, केदार हो या काशी…..
प्रभु राम भी करें पूजा जिनकी रामेश्वर कहलाए,
कृष्ण प्रेम में नाचे भोले गोपेश्वर बन जाए,
अमलेश्वर घूमेश्वर शंकर भीमेश्वर अविनाशी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण-कण में केदार हो या काशी….
भस्म है ओढ़े देह पर महिमा महाकाल की भारी,
सोमनाथ मल्लिकार्जुन शंभू नागेश्वर त्रिपुरारी,
बैरागी जोगी है ऊंचे शिखरों का हैं वासी,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण-कण में केदार हो या काशी…..
चंद्र है सिर पे नाग गले में जटा में गंग समाए,
वैद्यनाथ भोले भंडारी डम डम डमरू बजाए,
त्रयंबकेश्वर शिव शंकर प्रभु राघव ये सुखराशि,
द्वादश ज्योतिर्लिंग है हर दिशा में है कैलाशी,
शिव ही बसे हैं कण-कण में केदार हो या काशी…..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile