Duniya Se Moh Bhang Hua Hai
दुनिया से मोह भंग हुआ है,
जब से मन तेरे संग लगा है,
दुनिया से मोह भंग हुआ है,
जब से मन तेरे संग लगा है…..
भूल गया हूँ दुनियादारी तुमको पाके,
अब और कही ना जाउ तेरे दर पे आके,
क्यों रूठे हो भोले हमको ये तो बताना,
दुनिया से मोह भंग हुआ है,
जब से मन तेरे संग हुआ है…
देखा है हमने हर एक नजारा,
पर देखा ना कुछ तुमसे प्यारा,
दूजा रंग चढ़े ना मुझपे,
जबसे तेरा रंग चढ़ा है,
दुनिया से मोह भंग हुआ है,
जब से मन तेरे संग हुआ है…
दर्शन से तेरे मन खिल जाता,
भक्त मनचाहा फल है पाता,
तेरी भक्ति का तो उमंग जगा है,
दुनिया से मोह भंग हुआ है,
जब से मन तेरे संग लगा है…….

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile