Tumne Hi To Racha Hai
तीनों लोकों में भोले,
तुम्हारी है सत्ता,
तुम्हारी मर्जी के बिना,
हिलता नहीं है पत्ता,
तुमने ही तो रचा है…..
चराचर जगत यह सारा,
सृष्टि समूल के,
हो तुम्हीं तो अधारा,
विनाश करने को,
पापियों का,
तुमने त्रिशूल धारा,
तुमने ही तो रचा है…..
गले भुजंग विराजे,
शशि शीश साजे,
त्रिपुण्डी तिलक तुमने,
भाल पे है धारा,
तुमने ही तो रचा है…..
तुम हो कैलाश वासी,
अजर अमर अविनाशी,
गूंजें चहूं ओर विश्व में,
हर हर शिव ओंकारा,
तुमने ही तो रचा है…..
श्रद्धा से जो शंकर,
कहे शरण में आ तुम्हारी,
महादेव भोले नाथ,
शिव शम्भू त्रिपुरारी,
भव सिंधु से उसको तारा,
जिसने लिया नाम तुम्हारा,
राजीव ने लिया नाम तुम्हारा,
तुमने ही तो रचा है……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile