Shiv Anek Me Shiv Ek Hai
शिव मुझमे है शिव तुम में है,
शिव अनेक में शिव एक है….
हर कण कण का मन है शिव से रौशन,
बोल बम बम मिलेंगे शिव के दर्शन,
बन जाऊं भस्म शिव मुझको ओढ़ ले,
मिल जाए अगर शिव जीवन भी छोड़ दे,
शिव राख में, शिव आग है,
शिव अनेक में शिव एक है……
शिव ही में धरती शिव ही में गगन समाये,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
शिव ही दिन, शिव ही रात सजाये,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
शिव ही से मुक्ति, शिव ही से जीवन पाए,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
शिव ही गंगा, शिव ही प्यास जगाये,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
शिव ही अमृत शिव ही विष पिलाये,
शिव प्राण है, शिव काल है,
ओमकार है, महाकाल है,
शिव मुझ में है, श्वी तुम में है,
शिव अनेक में, शिव एक है……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile