Phir Se Sawan Ki Rut Aai
फिर से सावन की रुत आई,
मौका चूक ना जाना भाई,
दरबार में भोले शंकर के,
गंगा जल भरके चलो,
बम बम रटते चलो…..
वो ही कांवर उठाकर आते,
मेरे भोले जिसको बुलाते,
शिव शंकर की बात निराली,
कोई दर से लौटा ना खाली,
जिसने प्रेम से नाम लिया है,
भोले शंकर ने क्या ना दिया है,
ना कोई भोले जैसा दानी,
ना कोई भोले जैसा ज्ञानी,
परिवार में भोले शंकर के,
गंगा जल भरके चलो,
बम बम रटते चलो…..
जिसपे भक्ति का रन्ग चढ़ा है,
इस दुनिया में वो ही बड़ा है,
भोले बाबा की की जिसने भक्ति,
उसका काम ना कोई अड़ा है,
देख एक बार कांवड़ उठा के,
और मन से तू बम बम गाके,
भोले बाबा को मनालो,
फिर जो चाहो वो ही पालो,
दरबार में भोले शंकर के,
गंगा जल भरके चलो,
बम बम रटते चलो……
शिव है दाता है और जग है भिखारी,
कहलाते है वो त्रिपुरारी,
उनके दर की है अद्भुत माया,
मेने क्या भी बाबा से पाया,
चलो छोड़ो अब जग के झमेले,
भरके गागर अब काँधे पे लेले,
लख्खा राज की बात बताता,
महिमा कावड़ की सुनाता,
दरबार में भोले शंकर के,
गंगा जल भरके चलो,
बम बम रटते चलो……

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile