Shiv Damaru Bajaye Ang Bhasm Ramaye
शिव डमरू बजाए अंग भस्म रमाये सर्पों का हार सजाये
मेरे शंकर भोले मेरे शंकर भोले
बैलों की असवारी बाबा थारी है
संग में रहती हरदम गिरिजा प्यारी है
देखो जरा देखो क्या रूप है, रूप बड़ा ही अनूप है
जो दर्शन पाये भव से तर जाए सर्पों का हार सजाये
मेरे शंकर भोले मेरे शंकर भोले
सर पे सोहे गंगा मस्तक चंदा है
गुण गाने से कटता यम का फंदा है
बाबा मेरे बाबा क्या हाल है, हाल बड़ा विकराल है
दुष्टों को खपाऐ, भक्तों को बचाए सर्पों का हार सजाये
मेरे शंकर भोले मेरे शंकर भोले
हरिकिशन शर्मा की बाबा अर्जी है
बेड़ा पार करो तो थारी मर्जी है
शिव शिव बोलो सब प्रेम से, प्रेम से नित नेम से
जो ध्यान लगाए वो सब सुख पाए सर्पों का हार सजाये
मेरे शंकर भोले मेरे शंकर भोले

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile