Trikal Darshi Trilok Swami
त्रिकालं दर्शी त्रिलोक स्वामी,
त्रिपुंड धारी त्रिअक्षयकंबक,
नृत्य गायन कला के स्वामी,
हे धर्म पालक अधर्म नाशक।।
है चल अचल में शवी तुम्हारी,
तुम आत्मा हो परमात्मा हो,
सृवेष तुम हो करुणेश तुम हो,
है भुल हम सब तुम ही शमा हो।
त्रिकाल दर्शी..
है चंद्र मस्तक जटा में गंगा,
है संगी साथी भव्य निशाचर,
है कंठ शोभा सर्पों की माला,
त्रिशूल कर में कटी बाघाम्बर।
त्रिकाल दर्शी..
अजात शत्रु हो मित्र सबके,
पवित्रता के आधार तुम हो,
मृत्युंजय तुम हो तुम्हीं हो अक्षय,
तुम ही सनातन ऊंकार तुम हो।
त्रिकाल दर्शी..

मैं पंडित सत्य प्रकाश, सनातन धर्म का एक समर्पित साधक और श्री राम, लक्ष्मण जी, माता सीता और माँ सरस्वती की भक्ति में लीन एक सेवक हूँ। मेरा उद्देश्य इन दिव्य शक्तियों की महिमा को जन-जन तक पहुँचाना और भक्तों को उनके आशीर्वाद से जोड़ना है। मैं अपने लेखों के माध्यम से इन महान विभूतियों की कथाएँ, आरती, मंत्र, स्तोत्र और पूजन विधि को सरल भाषा में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि हर भक्त अपने जीवन में इनकी कृपा का अनुभव कर सके।जय श्री राम View Profile