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पान को प्रसाद बाबा करो स्वीकार जी भोग लगाओ

पान को प्रसाद बाबा करो स्वीकार जी, भोग लगाओ भजन श्याम बाबा की भक्ति में अर्पित श्रद्धा और प्रेम को दर्शाता है। भक्त अपने आराध्य को प्रेमपूर्वक पान, प्रसाद और भोग अर्पित करता है, जिससे उसकी भक्ति और सेवा का भाव प्रकट होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि श्याम बाबा केवल सच्ची श्रद्धा और प्रेम के भूखे हैं, और जो भी उन्हें सच्चे मन से भोग लगाता है, उसकी झोली कृपा से भर जाती है।

Paan Ko Prasad Baba Karo Swikar Ji Bhog Lagao

पान को प्रसाद मैंया करो स्वीकार जी
भोग लगाओ थारी करां मनुहार जी

1.. कलकत्ता बनारस को, फ्लेवर मंगाया हां
चांदी वाळो चमकिलो, बर्क लगाया हां
मिठो मिठो पान ई मैं, भग्तां को प्यार जी.. भोग

2.. काची पाकी सुपारी तू, चाहे जो घलाय ले
भगतां की इच्छा है, एक बार तो तू खाय ले
होंठ होसी लाल जियां, करयो सिणगार जी.. भोग

3.. रह ज्यावैगो धोको गर, आज नही खावै
रोज रोज पान को, प्रसाद कोनी आवै
मौका पर चौका लगाले, अब क्यां की ऊंवार जी.. भोग

4.. पान के प्रसाद को तो, न्यारो ही रुबाब है
खायां पाछै तू भी कहसी, सवाब ला जवाब है
अम्बरीष कहवै पान खाणे, आज्यो हर बार जी.. भोग

श्याम बाबा की भक्ति में समर्पित प्रत्येक भोग और प्रसाद उनकी कृपा को प्राप्त करने का माध्यम बनता है। “पान को प्रसाद बाबा करो स्वीकार जी, भोग लगाओ” भजन भी इसी भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। श्याम प्रेम और उनकी कृपा का अनुभव करने के लिए मुझे मस्ती चढ़ गई रे, सुन लो श्याम पुकार हमारी, सांवलिया सरकार तुम्हारी लीला न्यारी है, और जब से हम श्याम तेरे सहारे हुए भजन भी पढ़ें और श्याम जी की भक्ति में मग्न हो जाएं।

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