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जब दिन ग्यारस का आता है सांवरिया माल लुटाता है

भक्तों, जब दिन ग्यारस का आता है सांवरिया माल लुटाता है श्याम बाबा की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन खाटू नगरी में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है, हर कोई बाबा के दर्शन के लिए आतुर रहता है, और उनके चरणों में शीश नवाने के लिए दौड़ा चला आता है। आज हम जिस भजन ग्यारस का दिन की चर्चा कर रहे हैं, वह इस पावन दिन की महिमा और बाबा श्याम की कृपा का वर्णन करता है।

Jab Din Gyaras Ka Aata Hai Sanwariya Maal Lutata Hai

जब दिन ग्यारस का आता है, साँवरिया माल लुटाता है
साँवरिया माल लुटाता है, सबकी झोली भर जाता है
ये सबको गले लगाता है, जब दिन ग्यारस का आता है

ये सेठ बड़ा दिलवाला है, माँ अहलवती का लाला है
ये सबकी आश पुराता है, जब दिन ग्यारस का आता है

ग्यारस की तिथि निराली है, लौटा ना कोई खाली है
पल में संकट टल जाता है, जब दिन ग्यारस का आता है

ये सोया भाग जगाता है, सबकी किस्मत चमकाता है
ये सबकी बिगड़ी बनाता है, जब दिन ग्यारस का आता है

ये है दास रविन्दर का प्यारा, भक्तो की आँखों का तारा
ये भव से पार लगाता है, जब दिन ग्यारस का आता है

ग्यारस का दिन बाबा श्याम की असीम कृपा प्राप्त करने का अवसर है, जब भक्तजन उनकी भक्ति में पूरी तरह लीन हो जाते हैं। यह भजन हमें उनकी महिमा को समझने और भक्ति के इस पर्व को हृदय से अपनाने की प्रेरणा देता है। ऐसे ही अन्य भजनों जैसे “फागण मेला आया, बाबा बुला रहा, खाटू बुला रहा”, “खाटू नगरी जो भी आया, बनते उसके काम हैं”, “बड़ी दूर से चलकर आया हूँ”, और “तेरे भरोसे खाटू वाले रहता है मेरा परिवार” को भी अवश्य करें और श्याम प्रेम में रम जाएं।

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