O Dadi Mhane Kai Ko Nhi Jhunjhunu Bulawe Hai
न्यारी दादी प्यारी दादी म्हारी दादी,
मैं भी मैया थारी बेटी माँ से नजर चुरावे है,
ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,
मखमल जैया गोदी माहि माने भी सुलाले,
ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,
दादी थारी नगरी माहने पिहरियो सो लागे,
ऐसो पीहर ससरियो भी रोज ही जानो चाहे,
जद जद याद करू मैं थाने जोर सु हिचकी आवे है,
ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,
सारी सारी रात ओ मैया नैना मैं झुंझुन घूमे,
पलको से निंदिया की चिड़ियाँ हर दम उड़ जावे,
भूख लगे न प्यास लगे माँ हिवड़ो भर भर आवे है,
ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,
अडोसी पडोसी सगळा सो कैसा है रिश्तो अपनों,
माँ अपनी बेटी ने खुद से दूर रखे दिन कितनो,
आइए न धूड़कार के इब तो दुनिया हासी उड़ावे है
ओ दादी म्हाने काई को नहीं झुंझुनू बुलावे है,

मैं शिवप्रिया पंडित, माँ शक्ति का एक अनन्य भक्त और विंध्येश्वरी देवी, शैलपुत्री माता और चिंतापूर्णी माता की कृपा से प्रेरित एक आध्यात्मिक साधक हूँ। मेरा उद्देश्य माँ के भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप, उपासना विधि और कृपा के महत्व से अवगत कराना है, ताकि वे अपनी श्रद्धा और भक्ति को और अधिक दृढ़ बना सकें। मेरे लेखों में इन देवी शक्तियों के स्तोत्र, चालीसा, आरती, मंत्र, कथा और पूजन विधियाँ शामिल होती हैं, ताकि हर भक्त माँ की आराधना सही विधि से कर सके और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भर सके। जय माता दी! View Profile