तेरी छवि निराली श्री वृन्दावन बिहारी

वृन्दावन बिहारी श्री कृष्ण की छवि इतनी मनमोहक और अलौकिक है कि भक्त उनकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकते। तेरी छवि निराली श्री वृन्दावन बिहारी भजन उसी अनोखी छवि की महिमा का गुणगान करता है, जो न केवल नेत्रों को, बल्कि आत्मा को भी तृप्त कर देती है। यह भजन कृष्ण प्रेमियों के हृदय में बसे उस अद्वितीय सौंदर्य की अनुभूति कराता है, जो मोहन के दर्शन मात्र से ही जीवन को आनंद से भर देता है।

Teri Chhavi Nirali Shri Vrindavan Bihari

तेरी छवि निराली,
श्री वृन्दावन बिहारी,
सुरत है कितनी प्यारी,
श्री वृन्दावन बिहारी।।

तेरे बाल घुंघराले,
तेरे नैन है कटीले,
मुस्कान तेरी मोहक,
मनमोहना मुरारी,
तेरी छवि नीराली,
श्री वृन्दावन बिहारी।।

सिर मोर पंख साजे,
संग राधिका विराजे,
बंसी अधर पे शोभे,
हाय मैं तो जाऊं वारी,
तेरी छवि नीराली,
श्री वृन्दावन बिहारी।।

पैरों की तेरी पायल,
करे सबके मन को घायल,
तीनों लोक में है सबसे,
सुंदर छटा तिहारी ,
तेरी छवि नीराली,
श्री वृन्दावन बिहारी।।

तेरी छवि निराली,
श्री वृन्दावन बिहारी,
सुरत है कितनी प्यारी,
श्री वृन्दावन बिहारी।।

श्री कृष्ण की छवि जितनी मोहक है, उनकी कृपा भी उतनी ही अद्भुत है। जब भक्त अपने मन, वचन और कर्म से कृष्ण को समर्पित हो जाता है, तब वह नंदलाल की कृपा का पात्र बन जाता है। यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो “मन मोहन मूरत तेरी प्रभु”, “राधे रानी का दरबार निराला है”, “वृन्दावन में दीवाने लाखों ऐसे आते हैं” और “मेरा ये मन मतवाला राधे गोविंद के गुण गाए” जैसे अन्य कृष्ण भजनों को भी अवश्य पढ़ें। राधे राधे! जय श्री कृष्ण!

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