जीवन की राहों में जब दर्द असहनीय हो जाता है, जब हर ओर अंधकार छा जाता है, तब केवल एक ही आशा की किरण दिखाई देती है हमारे श्याम प्रभु। जख्मों पे श्याम मेरे मरहम लगाने आजा भजन, एक भक्त की उस व्यथा को दर्शाता है, जब वह संसार की पीड़ा से टूट जाता है और अपने श्याम धणी को पुकारता है। यह सिर्फ एक गुहार नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति है कि बाबा श्याम हमारे हर कष्ट को हरने वाले हैं।
Jakhmo Pe Shyam Mere Marham Lagane Aaja
दोहा-
तक़दीर का हूँ मारा श्याम,
मुकद्दर भी ये सो गया,
दुनिया के दुःख दर्दो से मेरा,
जख्मी दिल हो गया।
जख्मो पे श्याम मेरे,
मरहम लगाने आजा,
दुनिया का हूँ सताया,
अपना बनाने आजा।।
ठोकर मिली जहां की,
अपनों ने साथ छोड़ा,
होने लगे पराये,
यारों ने नाता तोड़ा,
दिल पे लगी है चोटें,
इनको मिटाने आजा,
ज़ख़्मों पे श्याम मेरे,
मरहम लगाने आजा।।
मुश्किल की इस घडी में,
कोई साथ ना निभाए,
खुद मेरी बेबसी ही,
मेरा जिगर जलाये,
अग्नि लगी है राहों में,
इसको बुझाने आजा,
ज़ख़्मों पे श्याम मेरे,
मरहम लगाने आजा।।
अरमान मेरे सारे,
अश्क़ों में बह रहे है,
रो रो के तुमको बाबा,
हर अश्क़ कह रहे है,
‘मीतू’ दरश का प्यासा,
दर्शन दिखाने आजा,
ज़ख़्मों पे श्याम मेरे,
मरहम लगाने आजा।।
ज़ख़्मों पे श्याम मेरे,
मरहम लगाने आजा,
दुनिया का हूँ सताया,
अपना बनाने आजा।।
श्याम बाबा अपने हर भक्त की पुकार सुनते हैं और संकट के समय सहारा देते हैं। जैसे “हारे के सहारे श्याम मुझे गले लगा लो ना”, “बाबा पे विश्वास होना चाहिए”, “सांवरे हारे का सहारा तेरा नाम है” और “श्याम पर कर भरोसा तू ये मुश्किल हल भी कर देगा” भजन भी यही सीख देते हैं कि जब भी जीवन में कठिनाइयाँ आएँ, श्याम का नाम लो, उनकी भक्ति करो हर घाव का मरहम बन जाएंगे। आइए, इस भजन को पढ़ें और अपने मन को श्याम की भक्ति से भर लें। जय श्री श्याम!