वृन्दावन, प्रेम और भक्ति की पावन धरा, जहां कृष्ण नाम की गूंज हर दिशा में सुनाई देती है। वृन्दावन में दीवाने लाखों ऐसे आते हैं भजन हमें उन भक्तों की याद दिलाता है, जो कान्हा के दर्शन की लालसा लिए वृन्दावन की गलियों में खो जाते हैं। यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण का अद्भुत संगम है, जहां हर भक्त श्रीकृष्ण के प्रेम में डूब जाता है।
Vrindavan Mien Deewane Lakho Aise Aate Hai
वृन्दावन में दीवाने,
लाखों ऐसे आते है,
मिलना तो है मोहन से,
मिलना तो है मोहन से,
राधे राधे गाते है,
वृंदावन में दीवाने।।
प्रीत जाने कैसी है,
श्याम के दीवानों की,
याद उन्हें रखते है,
याद उन्हें रखते है,
खुद को भूल जाते है,
वृंदावन में दीवाने।।
परवाह नहीं है इनको,
खुद की भूख प्यास की कभी,
पर भोग माखन का,
पर भोग माखन का,
श्याम को लगाते है,
वृंदावन में दीवाने।।
प्रेम हो तो ऐसा हो,
जैसा हमें मोहन से,
छोड़ चरणों को कभी,
छोड़ चरणों को कभी,
नहीं जाना चाहते है,
वृंदावन में दीवाने।।
वृन्दावन में दीवाने,
लाखों ऐसे आते है,
मिलना तो है मोहन से,
मिलना तो है मोहन से,
राधे राधे गाते है,
वृंदावन में दीवाने।।
जो भी वृन्दावन आता है, वो प्रेम और भक्ति के रंग में रंग जाता है। “मेरे दीन दयाल नंदलाल हरि वृंदावन मोहे बुला लेना”, “रुत या सावन की आई झूलन पधारो कान्हा बाग में”, “सावन में झुलाओ झूला हमारे बांके बिहारी को” और “बांके बिहारी मेरा तुम ही हो” जैसे भजन भी हमें श्रीकृष्ण की भक्ति में मग्न होने की प्रेरणा देते हैं। आइए, इस भजन को पढ़ें और वृन्दावन के इस दिव्य प्रेम का अनुभव करें। राधे राधे!