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देवता भी स्वार्थी थे दौड़े अमृत के लिए भजन लिरिक्स

देवता भी स्वार्थी थे दौड़े अमृत के लिए भजन भगवान शिव की महानता और त्याग को समर्पित है। जब समुद्र मंथन से निकले विष को देवता और असुरों ने अस्वीकार कर दिया, तब भगवान शिव ने बिना किसी स्वार्थ के उसे ग्रहण किया। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा देवत्व त्याग और परोपकार में निहित है, और शिवजी इस आदर्श के प्रतीक हैं।

Devta Bhi Swarthi The Daude Amrit Ke Liye Bhajan Lyrics

देवता भी स्वार्थी थे,
दौड़े अमृत के लिए,
हम सदा उनको भजेंगे,
जो जहर हंस के पिए,
हम नमन उनको करेंगे,
जो जहर हंस के पिए।।

जो रहे अमृत के पीछे,
सोचो वो क्या देव है,
जगत के खातिर विष पिया जो,
वो बने महादेव है,
हम नमन उनको करेंगे,
हम नमन उनको करेंगे,
जो सदा सबको दिए,
हम सदा उनको भजेंगे,
जो जहर हंस के पिए।।

औरो के खातिर जगत में,
सब नहीं जी सकते है,
जो है अविनाशी अजन्मा,
जहर वही पी सकते है,
हम नमन उनको करेंगे,
हम नमन उनको करेंगे,
जो मरे ना ना जिए,
हम सदा उनको भजेंगे,
जो जहर हंस के पिए।।

देवता भी स्वार्थी थे,
दौड़े अमृत के लिए,
हम सदा उनको भजेंगे,
जो जहर हंस के पिए,
हम नमन उनको करेंगे,
जो जहर हंस के पिए।।

इस भजन के माध्यम से हम भगवान शिव के उस महान त्याग को स्मरण करते हैं, जिसने समस्त सृष्टि को विनाश से बचाया। उनकी निःस्वार्थ भक्ति और करुणा हमें प्रेरित करती है कि हम भी अपने जीवन में परोपकार और सेवा को अपनाएं। शिवजी की शरण में आकर हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।



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