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प्रभू मेरे आँगन भी आना कभी भजन लिरिक्स

जब भक्त का हृदय प्रेम और श्रद्धा से भर जाता है, तो वह अपने प्रभु को अपने समीप पाने की प्रार्थना करता है। प्रभू मेरे आँगन भी आना कभी भजन इसी भावना को व्यक्त करता है, जहाँ भक्त अपने घर-आँगन में गुरुदेव के पावन चरणों का स्पर्श चाहता है, ताकि उसके जीवन में दिव्यता और कृपा का संचार हो।

Prabhu Mere Aangan Bhi Aana Kabhi Bhajan Lyrics

प्रभू मेरे आँगन भी,
आना कभी,
हो जो निकलना मेरी,
गली से कभी।।

पूजा करूँगा तेरी,
आरती उतारूँगा,
सूरत को तेरी फिर,
मै हरदम निहारूँगा,
आँसुओ से दाता,
तेरे चरण पखारूँगा,
बस जाओ दाता,
मेरे मन मे यदि,
प्रभू मेरे आंगन भी,
आना कभी,
हो जो निकलना मेरी,
गली से कभी।।

मँदिर को तेरे नित,
सजाता रहूँगा,
तेरी रज़ा मे जीवन,
विताता रहूँगा,
तेरी कृपा से झाड़ू,
लगाता रहूँगा,
जाना न फिर मुझे,
छोड़के कभी,
प्रभू मेरे आंगन भी,
आना कभी,
हो जो निकलना मेरी,
गली से कभी।।

चरण प्रभू रख दो,
घर तुम हमारे,
मिट जाऐगे दाता,
सब अँधियारे,
कर दो क़रम प्रभू,
हे नँगली वाले,
तन ये छूटे पर,
दर छूटे न कभी,
प्रभू मेरे आंगन भी,
आना कभी,
हो जो निकलना मेरी,
गली से कभी।।

प्रभू मेरे आँगन भी,
आना कभी,
हो जो निकलना मेरी,
गली से कभी।।

गुरुदेव की कृपा से ही यह जीवन सार्थक बनता है, और उनके चरणों में ही सच्ची शांति का वास है। जो भी उनके दर पर श्रद्धा से झुकता है, वह संसार के मोह से परे होकर आध्यात्मिक आनंद को प्राप्त करता है। इस पावन अनुभूति को और गहराई से समझने के लिए “गुरुदेव मेरे दाता मुझको ऐसा वर दो”, “तेरे चरणों में सतगुरु मेरी प्रीत हो”, “गुरुदेव तुम्हारे चरणों में बैकुंठ का वास लगे मुझको” और “सारे तीरथ धाम आपके चरणों में गुरुदेव” भजन भी पढ़ें और आत्मिक शांति का अनुभव करें।

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