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मेरी कुलदेवी माँ का दरबार सुहाना है लिरिक्स

जब भी मन भटकता है, जीवन में मुश्किलें आती हैं, तो हमारी कुलदेवी का आशीर्वाद ही हमें शक्ति देता है। मेरी कुलदेवी माँ का दरबार सुहाना है भजन में उस अद्भुत दरबार का वर्णन किया गया है, जहाँ श्रद्धालुओं की हर मुराद पूरी होती है। माँ का दरबार भव्यता, भक्ति और आस्था का संगम है, जहाँ भक्तजन अपनी अटूट श्रद्धा के साथ नतमस्तक होते हैं। आइए, इस भजन के भावपूर्ण शब्दों के माध्यम से माँ के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करें।

Meri Kuldevi Maa Ka Darbar Suhana Hai

तेरा रूप सुहाना है,
श्रृंगार सुहाना है,
मेरी कुलदेवी माँ का,
दरबार सुहाना है।।

तैरे माथे पर मैया,
रंग लाल चुनर सोहे,
तेरी रखड़ी और टीका,
हम सबका मन मोहे,
सिंदूरी बिंदिया का,
कायल ये जमाना है,
मेरी कुलदेवी मां का,
दरबार सुहाना है।।

प्यारी लागे नथनी,
तेरे कानो की बाली,
तेरी आँखों का कजरा,
और होठों की लाली,
गल हार ये नौलखा,
चेहरा भी नुराना है,
मेरी कुलदेवी मां का,
दरबार सुहाना है।।

तेरे सोवे बाजु बंद,
कंगना भी प्यारे हैं,
मेंहदी से रचे माँ के,
नख हाथ दुलारे हैं,
तन है माँ का सुंदर,
मन दया का खजाना है,
मेरी कुलदेवी मां का,
दरबार सुहाना है।।

तेरे पैरों की पायल,
मेरे दिल में खनकती है,
तेरी किरपा की बुंदे,
दिन रात बरसती है,
मैया तेरी रहमत का,
‘सुभाष’ दीवाना है,
मेरी कुलदेवी मां का,
दरबार सुहाना है।।

तेरा रूप सुहाना है,
श्रृंगार सुहाना है,
मेरी कुलदेवी माँ का,
दरबार सुहाना है।।

लेखक / प्रेषक – सुभाष चंद्र पारीक, जायल।

कुलदेवी माँ का दरबार सच में सुहाना और भक्तों के लिए हर कष्ट से मुक्ति दिलाने वाला है। जब हम श्रद्धा से उनका गुणगान करते हैं, तो मन को असीम शांति और शक्ति मिलती है। अगर आप माँ की महिमा को और भी गहराई से महसूस करना चाहते हैं, तो [“फूलों में सज रही है माँ अम्बे दुर्गे रानी”](भजन का लिंक) भजन को भी अवश्य सुनें, जो माँ दुर्गा की अलौकिक शक्ति को दर्शाता है। जय मातादी! ????????

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