मेरे मन देख ये आदत तेरी आगे चल कर

“मेरे मन देख ये आदत तेरी आगे चल कर” भजन हमें आत्ममंथन की ओर प्रेरित करता है। यह हमारे मन की उन प्रवृत्तियों को दर्शाता है, जो हमें सच्चे मार्ग से भटका सकती हैं। जब तक हम अपने मन को सतगुरु के चरणों में नहीं लगाते, तब तक यह सांसारिक मोह में उलझा ही रहेगा। इसलिए हमें समय रहते अपने गुरु का आश्रय लेना चाहिए और सच्ची राह पर चलना चाहिए।

Mere Man Dekh Ye Aadat Teri Aage Chal Kar

मेरे मन देख ये आदत तेरी,
आगे चल कर,
तेरी राहो में,
ये घातक होगी,
काहे मनमानी को तू करता है,
आगे चल कर,
तेरी भक्ती में ये,
बाधक होगी।।

गुरू बिन कोई काम न करना,
चाहे जीना हो या मरना,
जो तू चाहे भव से तरना,
गुरू बिन कोई,
न तार सके,
ये बात हमेशा याद रहे,
वर्ना पछिताएगा एक दिन प्राणी,
यम की जिस रोज तेरे द्वार पे,
आहट होगी,
मेरे मन देख यें आदत तेरी,
आगे चल कर,
तेरी राहो में, ये घातक होगी।।

सोते से तू जाग जरा,
मोह निँदिया को त्याग जरा,
गुरू चरणो मे ध्यान लगा,
दो दिन का है,
जीवन प्राणी,
हरि भजले रे ओ अभिमानी,
तेरा अपना न कोई जाएगा,
न तेरे साथ मे दुनिया की ये,
दौलत होगी,
मेरे मन देख यें आदत तेरी,
आगे चल कर,
तेरी राहो में, ये घातक होगी।।

नाम अगर तू ध्याएगा,
सफल ये तन हो जाएगा,
नर्क नही तू जाएगा,
दे दी कश्ती तुझको गुरु ने,
पतवार भी तेरे हाथो मे,
चाहे तो पार उतर ले प्राणी,
वर्ना मझधार मे तुझको,
बड़ी आफत होगी,
मेरे मन देख यें आदत तेरी,
आगे चल कर,
तेरी राहो में, ये घातक होगी।।

मेरे मन देख ये आदत तेरी,
आगे चल कर,
तेरी राहो में,
ये घातक होगी,
काहे मनमानी को तू करता है,
आगे चल कर,
तेरी भक्ती में ये,
बाधक होगी।।

गुरु की कृपा से ही मन को नियंत्रित किया जा सकता है और सही दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। “मेरे मन देख ये आदत तेरी आगे चल कर” भजन इसी सत्य की याद दिलाता है। अन्य भक्तिमय गुरु भजनों को पढ़ें, जैसे “उमर गुजर गुजर जाए मगर तू न सुधर पाए”, “तुझे दे दी गुरुजी ने चाबी तो फिर कँगाल क्यों बने”, “गुरुदेव मेरे दाता मुझको ऐसा वर दो” और “तेरे चरणों में सतगुरु मेरी प्रीत हो”।

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